अब दादी नानी के घर नहीं बच्चे जा रहे समर कैंप, बदलते दौर के साथ छुट्टियां बिताने का ट्रेंड भी बदला

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अब दादी नानी के घर नहीं बच्चे जा रहे समर कैंप, बदलते दौर के साथ छुट्टियां बिताने का ट्रेंड भी बदला

कोरबा। बदलते दौर के साथ छुट्टियां बिताने का ट्रेंड भी बदल गया है। आज से करीब 10-15 वर्ष पहले बच्चे स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करते थे। ताकि वे दादा-दादी, नाना-नानी के घर जाकर खूब मौज-मस्ती कर सकें। लेकिन अब ज्यादातर बच्चे ग्रीष्मकालीन अवकाश का उपयोग प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने, कंप्यूटर गेम खेलने, डांसिंग क्लास, समर कैंप में हिस्सा लेने में कर रहे हैं। गर्मियों की छुट्टियों के मायने पहले जहां दादी और नानी का घर था वहीं अब ये प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बदल चुका है। स्कूल बंद होते ही शहर के बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में रौनक बढ़ गई है। यहां नीट, जेईई सहित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। सीबीएसई का रिजल्ट आते ही इसमें और तेजी आएगी। इसका रिजल्ट एक दो दिन में जारी हो सकता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल से कक्षा दसवीं और बारहवीं का परिणाम जारी हो चुका है। छुट्टियां मनाने की बजाय कोचिंग और कॅरियर के लिए बच्चों की तैयारी शुरू हो गई है। कॅरियर काउंसलिंग के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल की हेल्पलाइन पर 40 से ज्यादा सवाल पूछे जा रहे हैं। इनमें कोचिंग इंस्टीट्यूट से उन कोर्स के बारे में बच्चे पूछ रहे हैं जिनमें अच्छा भविष्य है। शहर में 25 से ज्यादा कोचिंग इंस्टीट्यूट हैं जहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई जा रही है। शहर के स्कूल बंद होते ही यहां दाखिले बढ़ गए। इनमें प्रक्रिया जारी है। जानकारों के मुताबिक पढ़ाई के साथ मनोरंजन जरूरी हैं। ऐसे में बच्चों पर अभी से कॅरियर का दबाव नुकसानदायक साबित होगा, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है। कॅरियर के दबाव में केवल पढ़ाई पर जोर देना है। कॅरियर काउंसलर बताते हैं कि अभिभावक व बच्चे कोर्स और तैयारी के बारे में पूछ रहे हैं। कुछ ने तो अभी से कोचिंग भी शुरू कर दी है। छुट्टियों का यह नया ट्रेंड बनता जा रहा है।

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