आखिर कब टूटेगा माया के भ्रष्टाचार का तिलस्म
300 लाख की गड़बड़ी की जांच ठंडे बस्ते में ,15 दिन में देनी थी जांच रिपोर्ट सात माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी जांच
कोरबा । परियोजना प्रशासन एकीकृत आदिवासी विकास विभाग में 300 लाख की गड़बड़ी का मामला ठंडे बस्ते में है। पूर्व सहायक आयुक्त माया वारियर के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार का यह मामला फिर तूल पकड़ने लगा है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर माया के भ्रष्टाचार का तिलस्म कब टूटेंगा। परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास कोरबा में सात माह पूर्व महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यालय से गायब होने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है। सात माह पहले जब विभाग में बड़ी गड़बड़ी की आशंका जतायी गई तब तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने एडीएम के नेतृत्व में जांच दल गठित किया था और 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने आदेशित किया था। लेकिन सात माह गुजरने को है और अब भी इस मामले में जांच ही चल रही है। इस जांच को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि कहीं तत्कालीन सहायक आयुक्त आदिवासी को बचाने की कवायद तो नहीं हो रही है। पूरा मामला तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल के दौरान का है। जब प्रशासन के अनेक विभाग में लूट खसोट मची हुई थी। उसी दौरान परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिबासी विकास विभाग कोरबा में सहायक आयुक्त के पद पर माया वारियर पदस्थ थीं। उनके कार्यकाल के समय राज्य शासन के द्वारा विभाग को 627.56 लाख की राशि प्रदान की गई थी। इसमें से 495.79 लाख रुपए छात्रावास व आश्रमों के रेनोवेशन एवं सामग्री आपूर्ति के लिए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा को कार्य एजेंसी नियुक्त करते हुए राशि प्रदान की गई थी। इस राशि में से 404 लाख रुपए सिविल कार्य के लिए दिया गया था। उक्त प्रदाय राशि में से माया वारियर के द्वारा 300 लाख रुपए व्यय किया गया, लेकिन इससे संबंधित कार्य आदेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका, देयक वाउचर, मूल मस्ती और अन्य अभिलेख उनके जाने के बाद से गायब बताए जा रहे है। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने 22 मई 2023 को आदेश जारी कर पूरे मामले की जांच के लिए अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू के नेतृत्व में टीम गठित की। इस टीम में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरवा श्रीकांत कसेर अन्य विभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा नरेंद्र सरकार, उप अभियंता आदिवासी विकास ऋषिकेश बानी और सहायक लेखा अधिकारी नगर निगम अशोक देशमुख शामिल है। इस टीम को 15 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी लेकिन आज पर्यंत तक जांच ही जारी है। इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। सात माह गुजर चुके है लेकिन मामले में रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। जांच के आदेश देने वाले कलेक्टर बदल चुके है। प्रदेश में काबिज कांग्रेस सरकार की भी विदाई हो चुकी है। भाजपा सत्ता में आ गई है। जिसके मुखिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न खाऊंगा और न खाने दूंगा, गृहमंत्री अमित शाह भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे कहते है। क्या अब प्रदेश की भाजपा सरकार के राज में 300 लाख के भ्रष्टाचार पर से पर्दा उठेगा या माया का भ्रष्टाचार का रहस्य बरकरार रहेगा।
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बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा
विभाग में 300 लाख खर्च हो गया और उससे संबंधित कोई भी दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं होना बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। जब यह मामला सामने आया तो विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में जांच टीम तो गठित कर दी गई मगर जांच अब भी चल रही है। बताया जा रहा हैकि संबंधित ठेकेदारों का बयान दर्ज हो पाया है। ठेकेदारों से निविदा से संबंधित सभी माकूल दस्तावेज मंगाने के बाद उक्त ठेकेदार भी अब जांच से दूर भाग रहे है।
यह था आदेश
पूर्व कलेक्टर संजीव झा द्वारा 22 मई 2023 को जारी आदेश में कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) मद अंतर्गत राशि रु. 627.56 लाख आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास रायपुर से परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कोरबा को प्रदाय किया गया है। जिसको श्रीमती माया वारियर, तत्कालीन परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कोरबा के द्वारा प्रस्तावित अनुसार आदेश क्रमांक 105 दिनांक 06.06.2022 के द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कोरबा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं अनुविभागीय अधिकारी विद्युत/यांत्रिकी लाईट मशीनरी नलकूप एवं गेट कोरबा को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। राशि रु. 627.56 लाख में से रू. 495.79 लाख छात्रावास/आश्रमों के रेनोवेशन एवं सामग्री आपूर्ति हेतु सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कोरबा को कार्य एजेंसी नियुक्त करते हुए राशि प्रदाय किया गया है, जिसमें की राशि रू. 404.00 लाख सिविल कार्य हेतु प्रदाय किया गया है, प्रदाय किये गये राशि में से लगभग राशि रु. 300.00 लाख का व्यय श्रीमती माया वारियर, तत्कालीन सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कोरबा के कार्यकाल में किया गया है। किन्तु संविधान के अनुच्छेद 275(1) मद अंतर्गत छात्रावास/आश्रमों में लघु निर्माण / रेनोवेशन कार्यों से संबंधित निविदा अभिलेख, कार्य आदेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका, देयक व्हाउचर, मूल नस्ती एवं अन्य अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने के फलस्वरूप उक्त नस्ती के जांच हेतु नीचे लिखे अधिकारियों की टीम गठित की जाती है। जांच टीम 15 दिवस में जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।
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