Sunday, February 15, 2026

ईद-अल-अज़हा 17 को, इबादतगाहों में होगी विशेष नमाज

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ईद-अल-अज़हा 17 को, इबादतगाहों में होगी विशेष नमाज

कोरबा। ईद-अल-अज़हा जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम (अब्राहम) द्वारा अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने की इच्छा की याद में मनाया जाता है। ईद-अल-अज़हा की तारीख इस्लामी चंद्र कैलेंडर, ज़ु अल-हज्जा के 10वें दिन पर निर्भर करती है। चूंकि बकरीद इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से मनाई जाती है, इसलिए हर साल ईद की तारीख थोड़ी अलग होती है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 12वें महीने जु अल-हज्ज की 10वीं तारीख को बकरीद का पर्व मनाया जाता है। इस साल ज़ु अल-हज्जा महीना 30 दिनों का है। इसलिए बकरीद 17 जून को ही मनाई जाएगी। ईद-अल-अज़हा का त्योहार त्याग, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। इस त्योहार पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं और उसके मांस को गरीबों और जरूरतमंदों में बांटते हैं। ईद-अल-अज़हा के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और नमाज पढ़ते हैं। इसके बाद वे कुर्बानी देते हैं। ईद-अल-अज़हा एक खुशी का त्योहार है और इसे परिवार और दोस्तों के साथ मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं, मिठाइयां खाते हैं और उपहार देते हैं। ये त्योहार गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है।

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