जिले में सरकारी स्कूलों के साथ वहां पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं है। प्राथमिकता के तौर पर स्कूलों में बाउंड्रीवाल होना चाहिए, जो है ही नहीं। ऐसे में प्रायमरी स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के साथ दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। खास कर वे स्कूल जो ग्रामीण क्षेत्र में हैं और स्कूल परिसर में मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है। यहां बताना होगा कि जिले में प्रायमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक कुल 2181 स्कूल संचालित हैं। जिसमें 1479 केवल प्रायमरी स्कूल हैं। जबकि बाउंड्रीवाल विहीन स्कूलों की संख्या 705 है। जिसमें सबसे अधिक 510 प्रायमरी स्कूल ऐसे हैं जो चारो तरफ तरफ से खुला है। कोई भी कहीं से भी स्कूल में प्रवेश कर सकता है। इन स्कूलों में अक्सर मवेशियों को विचरण करते देखा जा सकता है। यही नहीं बाउंड्रीवाल के अभाव में अक्सर ऐसे स्कूलों से सामान चोरी होने की सूचनाएं मिलती रहती हैं। स्कूल भवनों के साथ ही छात्रों को अध्ययन के लिए बेहतर माहौल मिल सके इसलिए हर साल शिक्षा विभाग द्वारा कार्य योजना (प्रस्ताव) बनाई जाती है। विभाग का छोटी-छोटी जरूरतों की ओर ध्यान ही नहीं जाता है।
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