कुत्ते के भौंकने से भड़के हाथी ने मंडी प्रभारी की ली जान, पत्नी ने भागकर बचाई जान, घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद

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कोरबा। प्रशासन की सख्त हिदायत के बावजूद मार्कफेड उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव नहीं कर सका, जिसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। वे तमाम खतरों के बीच केंद्र में धान की रखवाली कर रहे हैं। हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्रों में अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी, जो होली की रात सच साबित हुआ। उपार्जन केंद्र में घुसा लोनर हाथी कुत्ते के भौंकने से भड़क गया। हाथी ने धान को निवाला बनाते देख रहे मंडी प्रभारी पर हमला कर दिया। उसके हमले से प्रभारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी ने किसी तरह भागकर जान बचाई। मौके पर पहुंचे वन व पुलिस विभाग की टीम ने वैधानिक कार्रवाई पूरी की है। घटना से महकमें में हड़कंप मचा हुआ है। घटना कोरबा वनमंडल के कुदमुरा में घटित हुई। दरअसल रजगामार के प्रेमनगर बस्ती में राजेश कुमार सिंह राजपूत 55 वर्ष निवास करते थे। वह आदिवासी सेवा सहकारी समिति में कार्यरत थे। उन्हें धान खरीदी के लिए समिति के अंतर्गत आने वाले कुदमुरा उपार्जन केंद्र का प्रभारी बनाया गया था। उपार्जन केंद्र में खरीदी बंद होने के बावजूद उठाव के लिए करीब 1160 क्ंिवटल धान शेष था। जिसके चोरी चले जाने अथवा हाथी, मवेशियों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की संभावना थी। श्री सिंह धान की रखवाली के लिहाज से अपनी पत्नी पिंकी देवी के साथ उपार्जन केंद्र में ही रह रहे थे। वे बुधवार की रात भी केंद्र में ही थे। इसी बीच रात करीब 1.35 बजे लोनर हाथी बाउंड्री तोड़कर भीतर घुस गया। लोनर हाथी ले बोरियों में भरकर रखे गए धान को निवाला बनाना शुरू कर दिया। यह सब मंडी प्रभारी एक पत्थर की आड़ में बैठकर देख रहे थे। उन्होंने हाथ में तेज रोशनी वाला टॉर्च में लिया हुआ था। हाथी को उपार्जन केंद्र में देख एक कुत्ता भौंकने लगा, जिससे लोनर हाथी भड़क गया। उसे दौड़ाते देख कुत्ता भाग निकला। इस बीच हाथी से मंडी प्रभारी का सामना हो गया। लोनर हाथी ने मंडी प्रभारी पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी ने भागकर जान बचाई। यह खबर मिलते ही विभागीय अमले में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना वन विभाग के अलावा पुलिस को दी गई। रात करीब दो बजे रेंजर सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तब तक हाथी जंगल की ओर लौट चुका था। गुरूवार की सुबह वन व पुलिस विभाग की टीम ने केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला तो पूरी घटना कैद मिली। जिससे मंडी प्रभारी की मौत हाथी के हमले से होने की पुष्टि हुई। खासबात तो यह है कि प्रशासन द्वारा लगातार हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्रों से प्राथमिकता के साथ धान उठाव के निर्देश दिए जा रहे थे। इसके बावजूद चिहांकित 8 केंद्रों में धान का उठाव नही हो सका है। इसकी वजह धान खरीदी बंद होने के बाद मिलर्स को जारी डीओ को बताया जा रहा है। बहरहाल इस घटना में हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्रों में धान उठाव की लचर व्यवस्था को उजागर कर दिया है। घटना की सूचना मिलने पर डीएफओ प्रेमलता यादव के निर्देश तथा एसडीओ दक्षिण सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंंची। वन व पुलिस की टीम ने वैधानिक कार्रवाई पूरी की। तत्पश्चात मंडी प्रभारी के शव को निजी वाहन से सीएचसी करतला ले जाया गया, जहां पीएम की कार्रवाई पूरी की गई। तत्पश्चात नियमानुसार मृतक की पत्नी पिंकी देवी को 25 हजार रूपए तत्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई।

संघ ने की उठाव व सुरक्षा की मांग
घटना की जानकारी होते ही सहकारी समिति कर्मचारी संघ के पदाधिकारी व सदस्य एकत्रित हो गए। उन्होंने संघ की ओर से पीड़ित परिवार को दस हजार की सहायता राशि दी। साथ ही हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्रों से तत्काल धान उठाव व सुरक्षा की मांग रखी। इस दौरान उप पंजीयक सहकारी संस्था एमआर ध्रुव, संघ के पदाधिकारी विनोद भट्ट, तुलेश्वर कौशिक, वीपी वैष्णव, चंद्रशेखर कैवर्त, अशोक दुबे, दुलीचंद,दुर्योधन कंवर, कुलेश्वर सोनी कोरकोमा समिति के अध्यक्ष ईश्वर राठिया सहित अन्य उपस्थित थे।

8 केंद्रों में पड़ा है 28 हजार 994 क्विंटल धान
जिले में इस बाद धान खरीदी के लिए 65 उपार्जन केंद्र बनाए गए थे, जिसमें 8 उपार्जन केंद्र को हाथी प्रभावित के रूप में चिहांकित किया गया था। बताया जा रहा है कि इन केंद्रों में कुल 28 हजार 994 क्विंटल धान जाम पड़ा है। जिसमे लेमरू में 3हजार, श्यांग मे 18 हजार, चिर्रा में 5 हजार, चचिया में 230 क्विंटल व कुदमुरा में 1160 क्विंटल धान शामिल है।

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