कोयला कर्मियों को डेढ़ रुपए की बख्शीश से हुई थी बोनस की शुरुआत
कोरबा। बात कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण के पूर्व की है। तब निजी मालिक मिठाई के डिब्बे के साथ कोयला मजदूरों को दुर्गापूजा पर डेढ़-दो रुपए की बख्शीश दिया करते थे। राष्ट्रीयकरण के बाद इसी बख्शीश ने बोनस (प्रॉफिट लिंक्ड रिवार्ड) का रूप ले लिया। आज इसका स्वरूप यह है कि प्रति कोयला मजदूर 85 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। कोल इंडिया एवं अनुषंगी कंपनियां बोनस मद में तकरीबन 19 सौ करोड़ रुपए का भुगतान करेंगी। कोल सेक्टर के पुराने नेता बताते हैं कि निजी खदान मालिक दुर्गापूजा के अंतिम समय यानी सप्तमी – अष्टमी को बख्शीश का भुगतान करते थे। इसकी वजह यह थी कि मजदूर पहले अपने गांव भागें नहीं। तब कोयला खदान में कोई काम करना नहीं चाहता था। मैनुअल खनन के कारण ज्यादा हादसे होते थे। वही लोग कोयला खदानों में काम करते थे, जिनके पास पेट पालने का कोई विकल्प नहीं था। तब ज्यादातर खदान मालिक गुजराती थे। बिहार यूपी से कोयला खनन के लिए मजदूरों को लाते थे। आज भी बिहार- यूपी के क्षेत्रवार मजदूरों का पुराना धौड़ा कोलियरी क्षेत्रों में देखने को मिलता है। तब स्थायी प्रकृति की नौकरी भी नहीं थी। फावड़ा और टोकरी से कोयले की खुदाई और ढुलाई होती थी।एसईसीएल अपने कर्मचारियों के बोनस पर 322 करोड़ खर्च करेगी। कम्पनी के प्रत्येक कर्मचारी को 85 हजार रुपए बतौर बोनस (परफार्मेंस लिंक्ड रिवार्ड) मिलेंगे। पिछले 12 वर्षों में कर्मचारियों के बोनस में 5 गुना बढ़ोतरी हुई है । 2010 में कर्मचारियों को 17,000 रुपये बोनस मिले थे वहीं पिछले वर्ष बोनस की राशि 76500 रही थी । कोल इंडिया एवं अनुषांगिक कंपनियों सहित सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के कामगारों का बोनस तय करने हेतु नई दिल्ली में बैठक आहूत की गई थी, जिसमें कोल इण्डिया प्रबंधन व यूनियन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अगर पूरे कोल इण्डिया को देखा जाए तो यहाँ दो लाख 17 हजार 429 कर्मचारी कार्यरत हैं। इस प्रकार इन कर्मचारियों के मध्य 1800 करोड़ से अधिक की राशि का वितरण होगा ।
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बोनस से कोरबा के बाजार में आएगी बहार
कोल इंडिया एवं अनुषंगी कंपनियां अपने 2.27 लाख कोयलाकर्मियों के बीच 21 अक्तूबर तक 18 सौ करोड़ रुपए का भुगतान करेंगी। कोरबा के एसईसीएल कर्मियों के खाते में भारी भरकम बोनस राशि आएगी। यूं तो बोनस कई कंपनियां भी देती हैं, लेकिन कोरबा में कोयले का बोनस सबसे ज्यादा होता है। जिले के हर इलाके में कोयलांचल है। एसईसीएल के कारण कोरबा सबसे सघन कोयला क्षेत्र है। जिले में में कई खदानें हैं। करोड़ों में कोयलाकर्मियों को बोनस का भुगतान होगा। यानी कोयला कर्मियों की पूजा बल्ले-बल्ले होगी।
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