कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना में लगभग 70 लाख टन कोयले की संदिग्ध हेराफेरी, संभावित 2100 करोड़ रू. के घोटाले, सरकारी संपत्ति के दुरूपयोग एवं आपराधिक षड़यंत्र की उच्च स्तरीय जांच और कठोर की मांग छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने की है। दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में भाजपा नेता के फार्म हाऊस में अवैध अफीम की खेती तथा बलरामपुर जिले में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामले की उच्चस्तरीय जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर राजनीतिक संगठन) जिला संयोजक अतुल महंत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों एवं तथ्यों के विशलेषण से यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कुसमुंडा परियोजना के कोयला स्टॉक के रिकॉर्ड में भारी अनियमितता कर लगभग 70 लाख टन कोयले की संदिग्ध हेराफेरी की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2100/-करोड़ से अधिक बतायी जा रही है। प्राप्त आंकड़ो के अनुसार मार्च 2025 के क्लोजिंग स्टॉक में लगभग 96,90,541.49 टन कोयला दर्शाया गया था, जबकि अप्रैल 2025 से ओपनिंग स्टॉक में यह घटकर 89,99,258.16 टन दर्ज किया गया। इसी तरह दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में एक भाजपा नेता के फार्म हाऊस में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती का गंभीर मामला उजाकर हुआ है। पुलिस एवं नार्कोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो की संयुक्त कार्यवाही में लगभग 14 लाख अफीम के पौधों जप्त किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनकी अनुमानित कीमती लगभग 8 करोड़ बतायी जा रही है। बलरामपुर जिले में भी अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यह खेती मक्के की फसल के बीच छुपाकर की जा रही थी, ताकि किसी को संदेह न हो, इस मामले में भी पुलिस एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुँच कर जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है तथा एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत कार्यवाही की जा रही है।
इन दोनों घटनाओं में छत्तीसगढ़ जैसे शांति प्रिय और संस्कारी प्रदेश की छवि को अत्यंत धूमिल किया गया है। प्रदेश में इस प्रकार नशीले पदार्थों की अवैध खेती और उससे जुड़े नेटवर्क का फैलना अत्यंत चिंता जनक है। दोनों मामलों को लेकर कलेक्ट्रेट मेन गेट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन गया।
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