Monday, February 16, 2026

कोरबा सीट पर बारी बारी जीत के रिवाज से कांग्रेस को रहना होगा सचेत

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कोरबा सीट पर बारी बारी जीत के रिवाज से कांग्रेस को रहना होगा सचेत

कोरबा। लोकसभा सीट 2009 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है। इस सीट पर अब तक हुए तीन चुनाव में दो बार कांग्रेस की जीत हुई। 2009 में कांग्रेस के डा. चरणदास महंत, 2014 में भाजपा के डा. बंशीलाल महतो और 2019 के चुनाव में कांग्रेस की ज्योत्सना महंत जो कि अभी भी सांसद हैं, उन्होंने चुनाव जीता था। विधानसभा सीटों के आंकड़ों से देखें तो छह सीट पर भाजपा, एक-एक में गोंडवाना – कांग्रेस के पास है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के वोटों की बढ़त भी कांग्रेस के लिए टेंशन बढ़ा रही है। कोरबा सीट पर बारी बारी जीत के रिवाज से भी कांग्रेस को सचेत रहना होगा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र सामान्य- चार, अजजा- चार आते हैं। इनमें भरतपुर-सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, कोरबा, कटघोरा, मरवाही में भाजपा के विधायक हैं। जबकि रामपुर में कांग्रेस और पाली-तानाखार में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विधायक हैं। छत्तीसगढ़ की कोरबा हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट बन चुकी है। इस पर सबकी निगाहें इसलिए लगी हैं, क्योंकि यहां कांग्रेस पर अपना प्रदर्शन दोहराने और भाजपा पर अपनी साख बचाने का दबाव है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से ज्योत्सना महंत चुनाव जीतकर सांसद बनी थीं। वर्तमान में वह इस सीट पर दोबारा कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रही हैं जबकि भाजपा की ओर से सरोज पांडेय चुनाव मैदान में हैं। सरोज भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। ऐसे में यहां भाजपा को अपनी साख बचाने की चिंता है।

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