खेतों की फसल को मवेशी पहुंचा रहे नुकसान,रोका छेका अभियान फ्लाप, किसानों की बढ़ी परेशानी
कोरबा। विभिन्न गांवों में रोका-छेका अभियान पूरी तरह फेल है। क्षेत्रों में तो गौठान है, लेकिन आवारा पशुओं को कोई रोकने वाला दूर दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। अधिकतर जानवर सडक़ों पर या खेतों में झुंड के झुंड चरते देखा जा सकता हैं, इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर बेसहारा पशु सडक़ों पर घूमने लगे या खेतों में घुसने लगे। इससे जहां सडक़ दुर्घटनाएं बढ़ीं। वहीं, किसानों को फसल का नुकसान होने लगा। इन बेसहारा मवेशियों से होने वाले नुकसान का तो न तो मुआवजा दिया जाता है और ना ही फसल बीमा योजना के तहत क्लेम देने की व्यवस्था है, लेकिन नुकसान का अंदाजा किसानों की इस बात से लगाया जा सकता है। इन मवेशियों से किसान इतना परेशान हैं कि पांच साल पहले किसान भरपूर खेती करते थे, किंतु अब किसानों ने खेती करने रुचि नही दिखा रहे है। खेती करने वाले किसान तो अपने खेतों को कटीले तारों से चारों ओर से घेरकर खेती कर रहे हैं, लेकिन छोटे किसान मवेशियों की मार झेल रहे हैं। दरअसल, इन मवेशियों से अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों ने तारों की बाढ़ लगाना शुरू कर दिया है।किसान बताते हैं कि इन छुट्टा मवेशियों की संख्या ज्यादा होती है तो मवेशी इन तारों को भी तोड़ देते हैं। ऐसे में फसल का नुकसान तो होता ही है, साथ ही दोबारा तारबंदी पर खर्च अलग होता है। किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार किसान की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है तो दूसरी ओर फसल की लागत बढ़ती जा रही है।
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