ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर में भी हो रहा सुआ नृत्य, लोक नृत्य छेरछेरा पर्व तक रहेगा जारी
कोरबा। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर में भी अब सुआ नृत्य करती महिलाएं घर-घर पहुंचने लगी है। यह नृत्य छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक नृत्य है। धान की कटाई के समय इसके लोकगीत को बड़े उत्साह से गाया जाता है। महिलाएं समूह में गौरा गौरी बनाकर उसके चारों ओर घूम कर सुआ गीत गाकर नृत्य करती हैं।साथ ही मिट्टी के सुआ बनाकर टोकरी में रखकर यह गीत गाती है। यह लोक नृत्य छेरछेरा पर्व तक चलता है। इस गीत के माध्यम से महिलाएं अपनी व्यथा भी व्यक्त करती है। तरी हरी ना ना, मोर ना ना रे सुआना के गीत सबसे अधिक गाए जाते हैं। कटघोरा के कसनिया की शाकंभरी सुआ नृत्य दल घर-घर पहुंचकर गाना गाती है। लोग अपनी स्वेच्छा से दान करते हैं।
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