कोरबा। ग्राम पंचायत धनगांव में 15 वें वित्त की राशि में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आने के बाद अब जनपद पंचायत कोरबा सीईओ ने जांच टीम का गठन कर दिया है। उम्मीद है कि अब भ्रष्टाचार की पोल खुलेगी।भ्रष्टाचार का यह आरोप और किसी ने नहीं बल्कि पूर्व कार्यकाल के सरपंच और पंचों ने सचिव तथा करारोपरण अधिकारी पर लगाया है। उन्होंने मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए कार्यवाही की मांग की थी। यहां तक की पूर्व सरपंच और पंचों की 7 माह की मानदेय राशि भी को भी नहीं बख्शा है।मामले की शिकायत जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत धनगांव के पूर्व सरपंच बुधकुंवर और पंचों ने कलेक्टर से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके कार्यकाल सन् 2000-2025 के 15 वें वित्त की राशि लगभग 13,00,000/- (तेरह लाख रुपए) को पंचायत सचिव बदन सिंह एवं करारोपरण अधिकारी डड़सेना ने मिलकर आहरण कर लिया है। इसके बावजूद कोई भी विकास कार्य नहीं किए गए हैं, जो किया गया है उसे अधूरा छोड़ दिया गया है। सचिव बदन सिंह कंवर जो कि अब रिटायर हो चुका है। यह राशि उसने अपने रिटायर होने के एक-दो सप्ताह पहले ही जनपद पंचायत कोरबा में पदस्थ करारोपड़ अधिकारी श्री डड़सेना के साथ मिलकर निकाला। 15 वें वित्त की राशि को विकास कार्य में लगाने के लिए उन्होंने कई बार प्रस्ताव पारित किए। शिकायत पत्र में कहा गया है कि सचिव एवं डड़सेना की मंशा ही राशि गबन करने की थी। इसीलिए सरपंच और पंचों के प्रस्ताव पारित कार्य नहीं हो पाए । 46 इसी कारण से उनके कार्यकाल के 7 माह की मानदेय राशि अभी तक उन्हें नहीं मिल पाई है। पूर्व सरपंच और पंचों ने 15 वें वित्त की राशि को गबन (भ्रष्टाचार) करने वालो पर उचित कार्रवाई कर उन्हें मानदेय राशि दिलाए जाने की मांग की थी। अब इस मामले में तीन सदस्य जांच टीम गठित कर दी गई है।

जांच टीम में यह हैं शामिल
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा ने जारी आदेश में कहा है कि बुधकुंवर पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत धनगांव एवं अन्य 14 पंचों द्वारा 15वें वित्त की राशि को गबन (भ्रष्टाचार) किये जाने की शिकायत और सरपंचों, पंचों के मानदेय राशि दिलाये जाने आवेदन प्रस्तुत किया गया है। शिकायत की जाँच के लिए
अधिकारियों/कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। टीम में महेश्वरी साव विकास विस्तार अधिकारी, रामकुमार पैंकरा
वरिष्ठ करारोपण अधिकारी और लकेश्वरी सारथी तकनीकी सहायक शामिल हैं। शिकायत की जाँच कर प्रतिवेदन 3 दिवस के भीतर प्रस्तुत करने कहा गया है। ताकि कलेक्टर के समय-सीमा (टी.एल.) में लंबित प्रकरण को विलोपित करने प्रतिवेदन प्रेषित किया जा सके।
![]()




























