Tuesday, February 17, 2026

छुइहापारा के ग्रामीण कीचड़ भरे रास्ते से कर रहे आना जाना, वर्षा ऋ तु शुरू होते ही बढऩे लगी परेशानी

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छुइहापारा के ग्रामीण कीचड़ भरे रास्ते से कर रहे आना जाना, वर्षा ऋ तु शुरू होते ही बढऩे लगी परेशानी

कोरबा। जिले में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। इसके बाद भी पाली क्षेत्र में एक ऐसा गांव है जहां के ग्रामीण तीन पीढ़ी से पक्की सडक़ बनने का इंतजार कर रहे हैं। पक्की सडक़ बनने के इंतजार में युवा आंखे अब धुंधली हो चली है, लेकिन विकास की रौशनी गांव तक नहीं पहुंची। आज भी गांव के ग्रामीण कीचड़ भरे मार्ग से गुजरने को मजबूर हो रहे हैं। खासकर वर्षा ऋतु में उनकी परेशानी और बढ़ेगी। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने पक्की सडक़ को लेकर आग्रह, निवेदन और शिकायत न की हो। पाली ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरबी के आश्रित ग्राम छुइहापारा के बीच पारा वार्ड क्रमांक 13 में ग्रामीण तीन पीढ़ी से निवास कर रहे हैं। जहां लगभग वर्षों बाद भी आज तक पहुंच मार्ग पक्की नहीं बन पाई है। मोहल्ला में लगभग एक हजार की आबादी निवासरत है। मोहल्लावासी बारिश के समय कठिनाइयों के साथ सडक़ पार अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच, सचिव भी उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। क्षेत्र के विधायक मोहल्ले में अनेक बार आते रहे हैं। इसके बाद भी पक्की सडक़ बनाने आवाज नहीं उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है, जिसमें स्वच्छता अभियान, प्रधानमंत्री सडक़ योजना, रोजगार गारंटी योजना शामिल है। इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। खनिज न्यास मद से ही सडक़ बन जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीण बताते हैं कि पूर्व व वर्तमान विधायक को वे मांग पत्र सौंप चुके हैं। इसके बाद भी उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाका है। वे वर्षों से पक्की सडक़ बनने का इंतजार कर रहे हैं। अब बारिश की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही कीचड़ भरे रास्ते से आवागमन का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी मार्ग से स्कूली बच्चे स्कूल आना जाना करते हैं। कीचड़ के कारण फिसल कर गिरने और स्कूल गणवेश खराब होने का डर बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव जाने वाले मार्ग पर कीचड़ इस कदर होता है कि यहां डायल 112 व संजीवनी एक्सप्रेस108 नहीं पहुंचती। गांव के बाहर वाहन तक गर्भवती महिलाओं व मरीजों को खाट पर लिटाकर ले जाना पड़ता है। जिससे भारी परेशानी होती है। छुइहापारा के आश्रित मोहल्ला में रहने वाले प्यारेलाल जाटवर का कहना है कि उनकी तीन पीढ़ी गांव में निवास करते आ रही है। गांव के लगभग दो किलोमीटर की सडक़ कच्ची है। बारिश के दौरान पूरे समय मार्ग पर कीचड़ सराबोर रहता है। कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन सडक़ पक्की नहीं बनाई गई। प्यारेलाल का कहना है कि क्षेत्र के विधायक व अन्य को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं।

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