कोरबा। फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष होलिका दहन का मुहूर्त प्रभावित रहा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण का साया पड़ने से पारंपरिक समय में होलिका दहन को लेकर संशय की स्थिति बनी रही। परिणामस्वरूप जिले के कई हिस्सों में सोमवार को ही विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर मंगलवार को भी चंद्रग्रहण उपरांत पुन: शुभ मुहूर्त में होलिका प्रज्वलित की गई। बुधवार को रंगोत्सव मनाया जाएगा। पंडितों के अनुसार जब पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण का संयोग बनता है, तब ग्रहण काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। ग्रहण के कारण रात्रिकालीन मुहूर्त प्रभावित हुआ, इसलिए अनेक मंदिर समितियों और मोहल्ला समितियों ने सोमवार देर शाम को ही वैकल्पिक शुभ समय में होलिका दहन संपन्न कराया। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि ग्रहण के सूतक काल में पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, इसलिए मंगलवार को भी ग्रहण उपरांत होलिका प्रज्ज्वलित की गई। श्रद्धालुओं ने ग्रहण व सूतक काल शुरू होने से पहले ही धार्मिक अनुष्ठान किए। कई स्थानों पर मंगलवार प्रात: या शाम को पुन: होलिका दहन कर परंपरा निभाई गई। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और कॉलोनियों में सोमवार रात होलिका दहन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं युवाओं और बच्चों में भी उत्साह देखा गया। होलिका दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व प्रारंभ हो गया है। बुधवार को रंगोत्सव के साथ होली मनाई जाएगी। बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की दुकानों पर भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है। इस वर्ष चंद्रग्रहण के कारण समय में परिवर्तन जरूर हुआ, लेकिन श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। बुधवार को अंचल रंगों में सराबोर रहेगा।
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