जर्जर भवनों में संचालित हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र, बारिश में बढ़ेगी परेशानी, अभिभावक चिंतित
कोरबा। जिले में नौनिहालों की शिक्षा, बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 297 भवनों की हालत ऐसी है कि कभी भी दीवार या छत गिर सकती है। जबकि 574 भवन किराए के मकान या फिर सामुदायिक भवन में संचालित हो रहे हैं। अब मानसून ने भी दस्तक दे दी है। बारिश में इन जर्जर भवनों में शिक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की बौद्धिक एवं शारीरिक विकास के साथ बेहतर पोषण आहार और खेल-खेल में शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी संचालित किए जा रहे हैं। जिले में 2583 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन इसमें से ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन की हालत अत्यंत खराब हो चुकी है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों के छत का प्लास्टर गिरने का भय बना हुआ रहता है।बावजूद इसके जर्जर भवनों में ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। कई केंद्रों के भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। इस कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजने से बच रहे हैं, तो कई अभिभावक साथ में केंद्र जाकर कुछ समय के बाद वापस लौट जाते हैं। लेकिन आंगनबाड़ी के निर्धारित समय तक बच्चों को नहीं छोड़ रहे हैं। हालांकि अभिभावक व जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर विभागीय अफसरों ने कुछ स्थानों के जर्जर भवन के स्थान पर किराए पर एक कमरे के भवन को लिया गया है, तो कई स्थानों पर अभिभावक व ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आपसी सहमति से सामुदायिक भवन में आंगनबाड़ी केंद्र लगाए जा रहे हैं। लेकिन इन भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र की तरह बच्चों को बेहतर सुविधाएं व खेल-कूद के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। इसी कमरे में बच्चों के लिए गर्म भोजन बनाए जा रहे हैं। बावजूद इसके विभागीय अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
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