तीसरे जुमा को भी मस्जिदों में नमाज अदा करने रही भीड़

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तीसरे जुमा को भी मस्जिदों में नमाज अदा करने रही भीड़

कोरबा। माहे रमजान में मुस्लिम बंधु रोजा रखकर खुदा की इबादत में मशगुल हैं। इस बार रमजान माह 12 मार्च से शुरू हुआ है। तीसरे जुमा को भी मस्जिदों में नमाज अदा करने पहुंचे मुस्लिम बंधुओं की भीड़ रही। चांद का दीदार 9 अप्रैल की शाम को हुआ तो 10 को ईद मनेगी। वहीं 9 की बजाए 10 को चांद दिखने पर अगले दिन ईद होगी। मुस्लिम परिवारों में ईद को लेकर काफी उत्साह है। नए कपड़े खरीदे जा रहे हैं। वहीं सेवाईयों की खरीदी भी शुरू हो गई है। माह-ए-रमजान की नमाज अदा करने लोग नगर की मस्जिदों में पहुंचने लगे हैं। रमजान के मद्देनजर मस्जिदों का रंगरोगन कर लिया गया है। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि रोजेदारों को वहां किसी तरह की असुविधा न हो। मुस्लिम धर्म संस्कृति में रमजान का पवित्र माह नि:संदेह इबादत, रोजा, नमाजों के इर्द गिर्द ही रहता है। इस माह में लोग एक दूसरे के खासकर कमजोर वर्ग का मदद करने में आगे रहते हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना सुबह 4 बजे से नमाज का दौर शुरू होकर देर रात तक बना हुआ है। पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ तरावीह की नमाजों में भी पूरा मुस्लिम समाज इस पवित्र माह में अपना समय लगा रहा है। रमजान में कुछ बालिग लोग 10 से लेकर पूरे 30 दिन तक सिर्फ मस्जिदों में ही रहते हैं और वहीं रात दिन इबादत करते हैं। ऐसी इबादत करने का अलग ही आनंद मिलता है। मुस्लिम मान्यता के अनुसार रोजा रखना या भूखे रहने का अर्थ उन गरीबों के भूख से बिलखते बच्चे, यतीम एवं बेहसहारा बच्चों की भूख का अहसास भी है। इसलिए रमजान के महीने में मुस्लिम समाज के लोग जो काबिल व सक्षम हैं वे अपने आय का ढाई प्रतिशत जकात (दान) के रूप में गरीबों को देते हैं। रमजान के 21, 23, 25, 27 या 29वीं रात में कोई एक रात सबसे मुकद्दस मानी जाती है।

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