Tuesday, January 27, 2026

दिव्यांग संजय ने रावण पुतला निर्माण को बनाया आय का जरिया, शारीरिक चुनौती को रचनात्मकता के आगे नहीं दिया झुकने

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दिव्यांग संजय ने रावण पुतला निर्माण को बनाया आय का जरिया, शारीरिक चुनौती को रचनात्मकता के आगे नहीं दिया झुकने

कोरबा। जहाँ एक ओर दिव्यांगता जीवन की राह में अक्सर रोड़ा बन जाती है, वहीं कोरबा के एक कलाकार ने अपनी शारीरिक चुनौती को अपनी रचनात्मकता के आगे झुकने नहीं दिया। एसईसीएल सुभाष ब्लॉक कॉलोनी में रहने वाले संजय कुमार लहरे के लिए दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आर्थिक संबल का सबसे बड़ा जरिया है। एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद, वह अपनी अनूठी कला के दम पर हर साल रावण के पुतले बनाकर लाखों की कमाई करते हैं, जिससे उनका साल भर का गुजारा चलता है। संजय कुमार लहरे बताते हैं कि उनके पास किसी तरह का नियमित रोजगार साधन नहीं था। शारीरिक अक्षमता के कारण अन्य काम मिलना मुश्किल था, लेकिन उनके भीतर रावण बनाने की अद्भुत कला थी। उन्होंने इसी कला को अपना जीवनयापन का माध्यम बनाया। विगत 18 वर्षों से वे लगातार दशहरे के लिए रावण पुतलों का निर्माण कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया था, जिसमें केवल तीन या चार पुतले बनाते थे, लेकिन आज उनकी कला और विश्वसनीयता इतनी बढ़ गई है कि उन्हें पूरे कोरबा जिले से ऑर्डर मिलते हैं। संजय के अनुसार, यह कला उनके लिए स्वरोजगार का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है। अब वह साल भर दशहरे के मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनकी कलाकारी के चर्चे दूर-दूर तक हैं, जिसके चलते कोरबा जिले की कई आयोजन समितियों से उन्हें ऑर्डर दिया है। इस वर्ष उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों से लगभग एक दर्जन रावण बनाने का ऑर्डर मिला है। संजय बताते हैं कि रावण निर्माण से उन्हें काफी आर्थिक राहत मिलती है। यह उनका मुख्य व्यवसाय बन चुका है। वह प्रत्येक वर्ष लागत (सामग्री, मजदूरी) हटाकर दो से ढाई लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा कमा लेते हैं। यह राशि उनके पूरे परिवार के लिए साल भर का खर्च उठाने में सक्षम होती है। इस साल संजय 55 हजार रुपए की लागत वाला सबसे महंगा रावण तैयार कर रहे हैं, जो उनकी बढ़ती व्यावसायिक सफलता को दर्शाता है। संजय कुमार लहरे की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि हुनर और दृढ़ संकल्प के सामने दिव्यांगता कभी बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि व्यक्ति में आत्मविश्वास हो, तो वह मौसमी कला को भी स्थाई आय का स्रोत बना सकता है।

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