कोरबा। जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का उठाव इन दिनों बेहद धीमी गति से चल रहा है। उपार्जन केंद्रों में लंबे समय तक धान का भंडारण होने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ती जा रही है। खुले में रखे गए धान के सूखने और नमी कम होने की चिंता बढ़ गई है। समितियों के सामने धान की रखवाली की टेंशन तो है ही हाथी प्रभावित केन्द्रों में लाखों के भंडारित धान पर खतरा भी मंडरा रहा है।
जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों में खरीदा गया धान समय पर मिलों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कई केंद्रों में धान के ढेर लग गए हैं, जिससे व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। नोडल प्रभारियों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द ही धान का उठाव नहीं हुआ तो धान अत्यधिक सूख सकता है। इससे वजन में कमी आने के साथ-साथ गुणवत्ता भी प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर शासन को होने वाले राजस्व और किसानों के हितों पर पड़ सकता है। मिलिंग के दौरान भी ऐसी स्थिति में दिक्कतें आने की संभावना बताई जा रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों और परिवहन एजेंसियों को उठाव में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गोदामों की क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक भंडारण की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि धान की गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि उठाव की गति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में समय पर ठोस कदम उठाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सूखत को लेकर समितियां चिंतित
जिले में धान की री-साइकलिंग की शिकायत के बाद धान उठाव में लगी रोक सोमवार से हट गई है। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव शुरू हो गया है। जिले में धान उठाव के लिए 133 मिलर्स ने पंजीयन कराया है। मिलरों ने बुधवार देर शाम तक की स्थिति में एक लाख 30 हजार से अधिक धान का उठाव किया। जबकि उपार्जन केंद्रों में अब भी 11 लाख 93 हजार 740 क्विंटल धान जाम पड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि मिलर्स सबसे अधिक शहरी क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों से उठाव कर रहे हैं। जिले के कोरबा और कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में कई उपार्जन केंद्र हाथी प्रभवित है। यहां धान के उठाव में तेजी नहीं है।
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