कोरबा। नर्मदा एक्सप्रेस को कोरबा तक विस्तार देने की मांग तेज हो गई है। नर्मदा एक्सप्रेस बिलासपुर से सुबह 11.35 बजे इंदौर के लिए रवाना होती है। वहीं इंदौर से छूटकर बिलासपुर दोपहर 1.50 बजे पहुंचती है। कोरबा से इंदौर या फिर बीच के स्टेशनों की यात्रा करने वाले लोगों को कोरबा से सुबह 8.15 बजे की रायपुर पैसेंजर या फिर 6.30 बजे की हसदेव एक्सप्रेस में निकलना पड़ता है। वहीं वापसी में जिस समय यह गाड़ी बिलासपुर पहुंचती है, उस समय वहां से कोरबा आने कोई सीधी ट्रेन नहीं रहती है। सीधी ट्रेन के लिए वहां 3 घंटे बैठना पड़ता है। इसके बाद साढ़े पांच बजे मेमू लोकल मिलती है। इससे यात्रियों को अनावश्यक दौड़ लगानी पड़ती है। रेल सुविधा के मामले में कोरबा काफी पिछड़ा हुआ है। अब तक रायपुर-नागपुर रूट के लिए ही यहां से ट्रेन सुविधा मिल पाई है। जिन यात्रियों को रायगढ़ की ओर या फिर कटनी की ओर यात्रा करनी होती है, उन्हें चांपा व बिलासपुर जाकर ट्रेन बदलनी पड़ती है। इस परेशानी से राहत पाने लगातार यहां की रेल संघर्ष समिति, जनप्रतिनिधियों, जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा व्यापारियों, छात्रों व सामान्य यात्रियों के हित में मांग की जाती रही है। लंबे इंतजार के बाद भी इन मांगों का कोई फायदा नहीं मिल पाया है। इस मांग को अब कोरबा के जनप्रतिनिधियों, रेल संघर्ष समिति व जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स ने नहीं, बल्कि रेल यात्री एकता परिषद, मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों ने उठाया है। यात्री एकता परिषद ने अपनी मांग में कटनी रूट पर बिलासपुर से इंदौर के बीच नियमित चलने वाली नर्मदा एक्सप्रेस को कोरबा तक विस्तार देने रेल मंत्रालय व भारत सरकार को पत्र लिखा है। रेल यात्री एकता परिषद मध्यप्रदेश ने रेल मंत्रालय को यह तर्क दिया है कि गाड़ी संख्या 18233/18234 नर्मदा एक्सप्रेस को कोरबा तक विस्तार देने से ऊर्जाधानी के व्यवसायी, उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ सामान्य यात्रियों को कटनी रूट पर ट्रेन मिल जाएगी। इससे लंबी दूरी की उनकी यात्रा आसान हो जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि इंदौर से बिलासपुर आने के बाद नर्मदा एक्सप्रेस का रैक 20 घंटे तक यार्ड में खड़ा रहता है, जबकि मेंटेनेंस में केवल सिर्फ 6 घंटे का समय लगता है। मतलब 14 घंटे तक इस गाड़ी का कोई उपयोग नहीं होता है। इसकी वजह से उक्त गाड़ी को कोरबा से चलाने में रेलवे प्रबंधन को असुविधा नहीं होगी।
ट्रेनों के रद्द होने से बढ़ेगी परेशानी
आगामी 30 मार्च से 11 अप्रैल तक मेमू-पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया गया है। कोरबा व आसपास क्षेत्रों के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में ट्रेनों का रद्द होना यात्रियों के लिए अत्यंत कष्टदायक साबित होगा। रेल संघर्ष समिति संयोजक राम किशन अग्रवाल, संरक्षक मनोज अग्रवाल, अंकित सावलानी ने मंडल रेल प्रबंधक को लिखे पत्र में कहा है कि प्रतिदिन हजारों यात्री कोरबा-चांपा तथा आसपास के क्षेत्रों से बिलासपुर व रायपुर तक यात्रा कर अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों को पकड़ते हैं। मेमू और पैसेंजर ट्रेनों के रद्द होने से उन्हें कनेक्टिंग ट्रेनों को पकड़ने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। यात्रियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए रद्द की गई ट्रेनों का सुचारू रूप से संचालन के लिए व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
![]()

