Sunday, February 15, 2026

प्रतिबंध के बाद भी मत्स्याखेट, डूबने से महिला की मौत, प्रतिबंध का नहीं दिख रहा है कोई असर

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प्रतिबंध के बाद भी मत्स्याखेट, डूबने से महिला की मौत, प्रतिबंध का नहीं दिख रहा है कोई असर

कोरबा। प्रशासन ने वर्षा ऋतु के दौरान मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन प्रतिबंध का असर नजर नहीं आ रहा है। बांगो बांध के डूबान क्षेत्र में नाव पर सवार होकर मत्स्याखेट करना एक परिवार के लिए महंगा साबित हुआ। अचानक तेज हवा तूफान के साथ हुई बारिश के चलते नाव पलट गई। जिससे नाव में सवाल महिला गहरे पानी में डूब गई। घटना के कुछ घंटे बाद महिला की लाश पानी में तैरते मिली। पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई उपरांत जांच शुरू कर दी है। घटना लेमरू थाना क्षेत्र के कांटाद्वारी की है। गांव में श्याम सिंह 50 वर्ष का परिवार निवास करता है। श्याम सिंह अपनी पत्नी फूलबाई कंवर 45 वर्ष के साथ बांगो बांध के डूबान क्षेत्र में झोपड़ी बनाकर रहते हैं। वे डूबान क्षेत्र में मत्स्याखेट कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। रविवार की दोपहर भी पति पत्नी अलग अलग नाव में सवार होकर मत्स्याखेट के लिए निकले हुए थे। वे दोनों हसदेव नदी के तिमंगला क्षेत्र तक साथ ही चल रहे थे, इसके बाद एक दूसरे से काफी दूर निकल गए। इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवा तुफान के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। बारिश होते देख श्याम सिंह झोपड़ी की ओर लौट आया, जबकि महिला नही लौटी। बारिश थमने के बाद पड़ोस में ही झोपड़ी बनाकर रहने वाला एक ग्रामीण भी तिमंगला क्षेत्र की ओर गया हुआ था। उसकी नजर पानी में तैर रही साड़ी पर पड़ी। जिसकी जानकारी ग्रामीण ने श्याम सिंह को दी। वे डूबान क्षेत्र में पहुंचे तो फूलबाई की नाव पलटी हुई थी। उसकी साड़ी नाव में फंसा हुआ था। वहीं फूलबाई की पानी में डूबने से मौत हो चुकी थी। जिसकी सूचना थाना पहुंचकर दी गई। सूचना मिलते ही लेमरू थाना प्रभारी कृष्णा साहू अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस की देखरेख में शव को डूबान क्षेत्र से बाहर निकाला गया। पुलिस ने रविवार को वैधानिक कार्रवाई उपरांत मृतिका का पोस्टमार्टम उपरांत शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
जिले के नदी नालों, सहायक नदियों, छोटे बड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर 15 अगस्त तक प्रतिबंध लगाया गया है। मत्स्याखेट करते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां नियमों की अनदेखी की जाती है। लोग मछली पकडक़र दूर दराज में खपा देते हैं। नियमों का पालन सुनिश्चित करने व मॉनिटरिंग की जवाबदारी मत्स्य विभाग की होती है, लेकिन विभाग सिर्फ औपचारिकता निभा रही है।

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