Saturday, January 24, 2026

बीते पांच वर्षों में एसईसीएल की कुल 10 खदानें हुई बंद, बंद खदानों में से दो कोरबा की

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कोरबा। जिले में एसईसीएल की कोयला खदानों के बंद होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते पांच वर्षों में एसईसीएल की कुल 10 कोयला खदानें बंद की जा चुकी हैं, जिनमें मध्यप्रदेश की चार और छत्तीसगढ़ की छह खदानें शामिल हैं। छत्तीसगढ़ की बंद खदानों में से दो कोरबा जिले में संचालित थीं, जिन्हें भी बंद कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनियों की खदानें लगातार बंद हो रही हैं। पिछले पांच वर्षों में देशभर में कोल इंडिया की कुल 42 ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड कोयला खदानें बंद की जा चुकी हैं। इनमें सबसे अधिक 18 खदानें वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की हैं, जबकि एसईसीएल दूसरे स्थान पर है, जिसकी 10 खदानें बंद हुई हैं। एसईसीएल की बंद की गई खदानों में छत्तीसगढ़ की विश्रामपुर ओपनकास्ट, महामाया भूमिगत, महान ओपनकास्ट, पवन भूमिगत, सुराकछार भूमिगत-3 एवं 4, तथा सुराकछार भूमिगत मुख्य खान शामिल हैं। वहीं मध्यप्रदेश में जमुना आरो-1 एवं 2 भूमिगत, कपिलधारा भूमिगत, न्यू अमलाई भूमिगत और पिनोरा भूमिगत खदानों को बंद किया गया है। बताया जा रहा है कि कई वर्षों से बंद पड़ी कोयला खदानों से दोबारा कोयला उत्खनन की योजना तो बनाई जा रही है, लेकिन अब तक कोरबा जिले में एसईसीएल की किसी भी बंद खदान से पुन: कोयला उत्पादन शुरू नहीं हो सका है।कोल इंडिया और एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बंद पड़ी भूमिगत कोयला खदानों में कंटीन्यूअस माइनर मशीन के जरिए कोयला उत्खनन की तैयारी की जा रही है। रजगामार की भूमिगत खदान में कंटीन्यूअस माइनर मशीन उतारी जा चुकी है, जिससे भविष्य में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। दूसरी ओर, एक-एक कर घाटे में चल रही कोयला खदानों को बंद करने का सिलसिला भी जारी है। इससे न सिर्फ कोयला उत्पादन पर असर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।

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