बॉयोगैस संयंत्र स्थापना में हो रही देरी, समझौते पर हस्ताक्षर हुए हो चुके हैं 8 माह
कोरबा। समझौते पर हस्ताक्षर हुए आठ माह पूरा होने को है अभी तक नगर निगम क्षेत्र के बॉयोगैस संयंत्र की स्थापना का काम शुरू नहीं हुआ है। कोरबा नगर निगम की योजना इस संयंत्र की स्थापना बरबसपुर के कचरा डंपिंग यार्ड क्षेत्र में करने की है। इसके लिए वहीं जमीन चिन्हित किया गया है। लेकिन एमओयू के बाद अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है। अब वर्षा ऋतू तक उम्मीद भी नहीं है। कचरा से बॉयोगैस बनाने के लिए बरबसपुर में प्रस्तावित यूनिट शुरू नहीं हो सका है। पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए रखने और ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार ने बेहद महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसके तहत कोरबा, अंबिकापुर, रायगढ़, बिलासपुर, राजनांदगांव और धमतरी में बायोगैस के उत्पादन के लिए कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की स्थापना बायो फ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए), गेल इंडिया लिमिटेड (गेल) एवं भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के मध्य त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह हस्ताक्षर इस साल 17 जनवरी को राजधानी रायपुर में किया गया था। नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता दीदीयों की ओर से डोर टू डोर कचरा संग्रहण किया जाता है। रोजाना सुबह कचरा घरों से उठाकर नगर निगम के एसएलआरएम सेंटर तक रिक्शा या ई रिक्शा से लाया जाता है। यहां कचरे की सफाई होती है। प्लास्टिक या अन्य जरुरी वस्तुओं को कचरा से निकालकर बाहर एकत्र किया जाता है। शेष कचरा को नगर निगम की गाड़ी से बरबसपुर के डंपिंग यार्ड में भेज दिया जाता है। कई बार निगम के एसएलआरएम सेंटर में गीला और सूखा कचरा को भी अलग किया जाता है। हालांकि नगर निगम की ओर से स्थानीय लोगों को कहा जा रहा है कि वे गीला सूखा कचरा अलग अलग रखें। इसे एक साथ स्वच्छता दीदीयों को प्रदान नहीं करें। कोरबा जैसे शहर के लिए यह योजना काफी कारगर हो सकती है। शहर में प्रदूषण की समस्या हमेशा से गंभीर विषय रहा है। अब कचरा से बायोगैस बनाने की योजना धरातल पर उतरती है तो इससे शहरवासियों को अपना शहर साफ-सुथरा दिखाई देगा।
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