भक्ति में इतनी शक्ति है कि भगवान को भी सातवें आसमान से नीचे जमीन पर उतरना पड़ता है-आचार्य राजेंद्र
कोरबा। भगवान हमेशा अपने भक्ति के ही वशीभूत है वह अपने भक्ति का मान बढ़ाते हैं, भगवान का कोई भक्त अपनी भक्ति की शक्ति से ही भगवान को भी सातवें आसमान से नीचे उतार लाता है। भागवत में केवल भगवान की ही कथा नहीं है इस महापुराण में भगवान के प्रिय भक्तों की दिव्य कथा है। इस महापुराण में श्री कृष्ण की कथा होते हुए भी इसे कृष्ण पुराण नहीं कह कर भागवत महापुराण कहा गया है। उक्त उद्गार बालको नगर के परसाभाठा नवधा पंडाल में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भागवत आचार्य राजेंद्र महाराज ने प्रकट किया। आचार्य ने ध्रुव चरित्र की कथा का वर्णन कर बताया कि दृढ़ संकल्प कर लेने पर कोई भी काम कठिन नहीं होता। 5 वर्ष के बालक ने भगवान की प्राप्ति और दर्शन का दृढ़ संकल्प किया था और उसे भगवान का दर्शन और साथ ही धु्रव लोक जैसा दिव्य स्थान भी मिला। यदि ध्रुव की माता सुनीति सुरुचि से यह कह दी होती कि मैं महाराज की बड़ी महारानी हूं मेरा बेटा ही राज्य का उत्तराधिकारी होगा,वह तपस्या करने नहीं जाएगा तो धु्रव चरित्र की कथा भागवत में नहीं होती। बच्चों की प्रथम गुरु माता ही होती है। माता सुनीति ने अपने बेटे ध्रुव को भगवान से जोडऩे के लिए तप तपस्या का अर्थात भगवान के प्रति आस्था का भाव जागृत किया और भगवान मिल गए। बुधवार को तीसरे दिन की कथा प्रसंग में देवहूति ए कपल भगवान का सत्संग , भगवान शिव और सती का संवाद , दक्ष यज्ञ वृतांत , जड़ भरत चरित्र और भक्त प्रहलाद की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य ने बताया कि भगवान हमारी आस्था और विश्वास में रहते हैं। भगवान के भक्त वही होते हैं जो भगवान से विभक्त नहीं होते अर्थात अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में भगवान को जोडक़र के रखते हैं। ऐसा करने से कर्म ही मनुष्यों के लिए पूजा के समान हो जाती है। हिरण्यकश्यप जो भगवान नारायण को अपना शत्रु मानता था और अपने नास्तिक भाव के कारण भक्त प्रहलाद को बहुत यातना देते हुए पूछा था कि तेरा नारायण कहां रहता है , तब प्रह्लाद ने बड़ी आस्था के साथ कहा कि मेरे भगवान नारायण सर्वत्र है , आप ऐसा क्यों नहीं पूछते कि मेरे भगवान कहां नहीं है , वे तो जल थल आकाश और धरती के कण-कण विराजमान है। यह संपूर्ण जगत ही विष्णु से व्याप्त है। हिरण्यकश्यप ने पूछा तब तो तेरा नारायण इस खंबे में भी होगा, प्रहलाद जी ने बड़े विश्वास के साथ कहा था कि हां पिता श्री मेरे नारायण आप में भी हैं मुझ में भी है और इस खंबे में भी है द्यतृतीय दिवस की कथा श्रवण करने सैकड़ो लोग शामिल हुए। प्रतिदिन स्रोतों को दिव्य सत्संग के साथ संकीर्तन एवं जीवंत झांकियां का दर्शन लाभ प्राप्त हो रहा है। श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति महानदी युवा संगठन के अध्यक्ष ओंकार सिंह ठाकुर एवं भागवत के यजमान सूर्यकांत श्रीमती श्रद्धा मिश्रा द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने की अपील की गई है।
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