Sunday, February 8, 2026

भाई-बहन के प्रेम पर्व पर रहेगा भद्रा का साया,राखी बांधने मिलेंगा तीन घंटा 36 मिनट का समय

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भाई-बहन के प्रेम पर्व पर रहेगा भद्रा का साया,राखी बांधने मिलेंगा तीन घंटा 36 मिनट का समय

कोरबा। भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा बहुत भारी पड़ रही है। राखी बांधने के लिए बहनों को सर्वश्रेष्ठ प्रदोष काल मुहूर्त में सिर्फ सात मिनट का समय मिलेगा। वह भी रात 9:02 से 9:09 बजे तक का। हालांकि रात 12.38 बजे तक राखी बांधी जा सकेगी। फिलहाल पंचांगों में राखी बांधने के लिए प्रदोष काल मुहूर्त रात 9.02 से रात 9.09 तक रहेगा है। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि द्वितीय श्रावण शुक्ला पूर्णिमा 30 अगस्त को सुबह 10.59 से प्रारंभ होगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी। भद्रा रात 9.02 तक रहेगी। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त की सुबह 10.59 से प्रारंभ होकर 31 अगस्त की सुबह 7.05 बजे तक रहेगी। भारतीय समय अनुसार 30 अगस्त को भद्रा सुबह 10:59 से प्रारंभ होकर रात्रि 9.02 तक रहेगी। शास्त्रोक्त मान्यता है कि भद्रा कुरूप और भक्षण प्रवृत्ति की मानी जाती है। जन्म के समय से ही यह सृष्टि का विनाश करने पर उतारू थी। इसे ब्रह्मा ने शांत कर 7वें करण में स्थान दिया। मुहूर्त चिंतामणि और अन्य ग्रंथों के अनुसार भद्रा में कई कार्यों को निषेध माना गया है। मुण्डन, गृहारंभ, विवाह संस्कार, गृह – प्रवेश, रक्षाबंधन पर इसका असर पड़ता है। पंडितों के अनुसार हिंदू धर्म में भद्रा काल को अशुभ माना गया है। इस दौरान शुभ या मांगलिक काम करने की मनाही होती है। आमतौर पर सुबह से ही रक्षाबंधन मनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो देर शाम तक चलता है। भद्रा काल के समय राखी बांधना वर्जित होता है। भद्रा काल में राखी बांधने से भाई के जीवन पर संकट आने की आशंका रहती है। इसी वजह से भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है।

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