कोरबा। भाजपा नेता व जनपद सदस्य अक्षय गर्ग की दिल दहला देने वाली जघन्य हत्या के सभी आरोपी जेल दाखिल करा दिए गए हैं, वहीं नाबालिक को बाल संप्रेषण गृह में दाखिल कराया गया है। इन आरोपियों के द्वारा हत्या को आनन-फानन में अंजाम नहीं दिया गया, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत मिर्जा मुश्ताक के द्वारा 15 दिनों से रणनीति तैयार की जा रही थी। पकड़े गए आरोपियों के हवाले से पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना के लिए चुनावी रंजिश तो बड़ी वजह थी ही, लेकिन वह विगत 20 दिसंबर से ग्राम मलदा में शुरू हुए क्रिकेट स्पर्धा के लगे बैनर-पोस्टर में अपनी तस्वीर कहीं भी ना देखकर कुछ ज्यादा ही विचलित हो गया। उसे यह अपमानजनक लगने के साथ-साथ यह भी लगा कि अब उसका रसूख और प्रभाव कम होने लगा है। तब उसने अक्षय गर्ग को रास्ते से हटाने की मुकम्मल कोशिश को अंजाम देने की ठान ली। उसने अपने खास सहयोगी विश्वजीत को तैयार किया और विश्वजीत ने दो अन्य को अपने भरोसे में लिया। इन्हें पैसा और गाड़ी देने का लालच मुस्ताक के द्वारा दिया गया। योजना के मुताबिक अक्षय गर्ग की रेकी करने के लिए गुलशन को तैयार किया गया। गुलशन को बटन वाला एक मोबाइल खरीद कर मुस्ताक ने दिया और अपने पास बटन वाला ही एक दूसरा मोबाइल मुस्ताक ने रखा। इस मोबाइल के जरिए दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। हत्या को अमलीजामा पहनाने के लिए ही इस मोबाइल का इस्तेमाल किया गया। 15 दिनों की योजना को मंगलवार 23 दिसम्बर की सुबह अंजाम देने के बाद सभी आरोपी जटगा, चोटिया होते हुए मोरगा पहुंचे। यहाँ ऊपर पुल से नदी में कुल्हाड़ी व चाकू को फेंका गया। आरोपियों की बदकिस्मती रही कि उन्हें दूर से जहां पानी नजर आ रहा था वहां सूखा स्थान था और टंगिया व चाकू इस सूखे स्थान में पड़े रहे। यहां से आगे बढ़कर आरोपी पुल के निचले हिस्से में पहुंचे और यहां खून के धब्बे लगे कपड़ों व सिम सहित मोबाइल को जलाया गया और फिर हाथ-पैर साफ कर वहां से सभी वापस लौटे। बताया गया कि वापस लौटते वक्त रास्ते में गाड़ी का अगला हिस्सा किसी से ठुक जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया और रेडिएटर टूट गया। कटघोरा के रास्ते वापसी में मुस्ताक ने कार को एक गेराज में छोड़ा। इसके बाद सभी अपने-अपने घर चले गए। मुस्ताक अपने गांव में बिंदास घूम रहा था और वह पूरी तरह से आश्वस्त था कि पुलिस के हाथ उस तक पहुंच ही नहीं पाएंगे।पुलिस ने इस पूरे मामले का चंद घण्टे में पर्दाफाश करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है लेकिन चुनावी विद्वेष में जघन्य हत्या जैसे अपराध को अंजाम देने को हर कोई अनुचित करार दे रहा है। इनका मानना है कि चुनाव में हार-जीत लगी रहती है। किंतु इस हार-जीत को इतने बड़े रंजिश और खतरनाक इरादे के रूप में तब्दील करने को किसी भी तरह की राजनीति में स्थान नहीं देना चाहिए।

पहले कार तक पहुंची पुलिस फिर पकड़ में आए आरोपी
इधर दूसरी तरफ पुलिस ने जब रंजिशन और हालिया विवाद के आधार पर सुराग तलाशना शुरू किया तो मालूम हुआ कि अक्षय गर्ग की गाड़ी का पीछा एक कार से किया जा रहा था। उसकी कार के पीछे-पीछे उक्त प्रयुक्त वाहन लगातार नजर आई। मंगलवार को भी यह नजर आया किन्तु एक जगह पर पीछा करने वाली कार थम गई। पसान में 15 से 20 मिनट का अंतराल कार का पीछा करने को लेकर देखा गया और फिर यहीं से संदेह उत्पन्न हुआ। संदेह के आधार पर सफेद कलर की ब्रेजा अर्बन क्रूजर कार की तलाश शुरू की गई जिसमें सवार होकर हत्यारे घटना स्थल तक आये थे। पुलिस इस कार के मालिक तक पहुंची जिसने बताया कि कुछ दिन पहले ही उसने यह कर मुश्ताक को बेच दी थी क्योंकि वह इसकी किस्त नहीं पटा पा रहा था। पुलिस का शक यकीन में बदलने लगा ,तब बिना किसी संदेह के अविलंब मुश्ताक को उसके ग्राम मलदा से दबोच लिया गया।
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गैरेज में गाड़ी होने का हवाला देकर बचने की नाकाम कोशिश
कार के बारे में पूछने पर आरोपी पुलिस को गुमराह करने के लिए बताता रहा कि उसकी गाड़ी का 2 दिन पहले एक्सीडेंट हो गया है और 2 दिन से गाड़ी गैरेज में खड़ी है। पुलिस ने जब उक्त गैरेज पहुंचकर तस्दीक की तो सीसीटीवी कैमरा से ज्ञात हुआ कि गाड़ी हत्या दिनांक को ही वारदात के बाद के वक्त में गैरेज में ला कर छोड़ी गई थी। इसके बाद मुस्ताक से कड़ी पूछताछ शुरू की गई। उसने अपने खास सहयोगी विश्वजीत के साथ मिलकर अंजाम दिए गए हत्याकांड की कहानी बयां कर दी। इस मामले में 15 वर्षीय नाबालिक के परिजन का कहना है कि उनका बेटा तो अपने काम में व्यस्त था जिसे चलो आते हैं कह कर विश्वजीत अपने साथ ले गया था। लेकिन,दूसरी तरफ हत्या को अपनी आंखों से देखने के बाद भी इस नाबालिक ने घर में आकर किसी को कुछ नहीं बताया और खामोश रहा।
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