कोरबा। मकर संक्रांति के पावन पर्व को जिलेभर में लोगों ने आस्था के साथ मनाया। सनातन धर्म में मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से विशेष लाभ मिलता है। इसलिए लोगों सुबह स्नान के बाद दान कर पुण्य कमाया। लोगों ने मंदिरों में जाकर शीश नवाया और भगवान की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख शांति की कामना की। श्रद्धालुओं ने अन्न दान कर पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाया। मान्यता है कि मकर संक्रांति परिवारों को टूटने से बचाता है। यह पर्व लोगों को सिखाता है कि जीवन में आगे बढ़ना है तो अपने माता-पिता की सेवा करें। जो लोग ऐसा करते हैं उनके परिवार फलते-फूलते हैं। शहर की सामाजिक संस्थाओं ने कार्यक्रम में दान किया तो गांवों में महिलाओं ने भी अपने साम?र्थ्य के अनुसार दान देकर पर्व की परंपरा का निर्वहन किया। नए साल के बाद आए इस त्योहार ने लोगों में नया जोश भरा। बुधवार को पूरे जिले में मकर संक्रांति परंपरागत ढंग से मनाई गई। इस बीच लोगों ने नदियों में डुबकी लगाई तथा मंदिरों में पूजा-अर्चना कर ब्राह्माणों को दान देकर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही स्नान-ध्यान करने के बाद चावल व पैसों का दान देने का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा। उसके बाद लोग तिल व लाई खाकर मकर संक्रांति के परंपरा का निर्वहन किया। मकर संक्रांति के मौके पर हसदेव नदी के किनारे स्नान के लिए लोगों की भीड़ दिखी। नदी के घाट पर लोगों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से प्रारंभ हो गया था। पूरे दिन स्नान व दान का सिलसिला चलता रहा। मकर संक्रांति के मौके पर लोगों ने स्नान के बाद देवालयों में पहुंचकर भगवान की पूजा अर्चना भी की। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों में पर्व को लेकर उत्साह में पूरे दिन कोई कमी नहीं दिखी। मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। सभी जगह स्नान के बाद श्रद्धालु अपने-अपने हैसियत के अनुसार काला तील, मीठा चावल और पैसा ब्राह्माणों को दान पुण्य किया। बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का आनंद उठाया। आसमान में रंग बिरंगी पतंगें नजर आ रही थी।
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