Sunday, February 15, 2026

मानिकपुर खदान से किया जाएगा सालाना 7 मिलियन टन कोयला खनन, एसईसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने दी मंजूरी

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मानिकपुर खदान से किया जाएगा सालाना 7 मिलियन टन कोयला खनन, एसईसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने दी मंजूरी

कोरबा। ऊर्जा संबंधी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कोयला खदानों का विस्तार कर रही है। खनन क्षमता बढ़ा रही है। इसी कड़ी में गेवरा, दीपका और कुसमुंडा के बाद अब मानिकपुर खदान के विस्तार की तैयारी है। इसके तहत खदान से सालाना कोयला उत्पादन 7 मिलियन टन करने की योजना बनाई गई है। इससे संबंधित प्रस्ताव को एसईसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने मंजूरी दे दी है। वर्तमान में मानिकपुर खदान की सालाना उत्पादन क्षमता पांच लाख 25 हजार मिलियन टन (52 लाख 50 हजार टन) है। कंपनी खदान विस्तार की तैयारी कर रही है। एसईसीएल की योजना मानिकपुर खदान से सालाना 7 मिलियन टन कोयला खनन की है। इससे संबंधित प्रस्ताव को एसईसीएल मुख्यालय से हरी झंडी मिल गई है और इसे जल्द ही पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही इस पर कार्य शुरू होगा। कोरबा एरिया अंतर्गत स्थित मानिकपुर खदान सरायपाली और अंबिका से बड़ी है। आने वाले दिनों में इस खदान का विस्तार ग्राम भिलाई खुर्द की तरफ होना है। स्थानीय स्तर पर कंपनी की ओर से खदान विस्तार को लेकर तैयारियां की जा रही है। प्रबंधन को उम्मीद है कि जिला प्रशासन के साथ मिलकर जल्द ही जमीन संबंधी समस्या को दूर कर लिया जाएगा।खदान विस्तार को लेकर एसईसीएल की ओर से पहले ही भिलाई खुर्द, रापाखर्रा और इसके आसपास के गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में खदान का विस्तार भिलाई खुर्द की तरफ किया जा रहा है। खदान को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी को जमीन की जरूरत है। कंपनी की ओर से खदान विस्तार के लिए भिलाई खुर्द में रहने वाले लोगों को दूसरे स्थान पर बसाने की कार्ययोजना बनाई गई है। उन्हें भिलाई खुर्द-1 में चिन्हित स्थान पर बसाए जाने की कार्ययोजना तैयार की गई है, लेकिन भिलाईखुर्द-2 के लोग यहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी समस्या को लेकर पेंच फंसा हुआ है और खदान विस्तार में यही सबसे बड़ा रोड़ा है। कंपनी के लिए दूसरी सबसे बड़ी समस्या खदान से लगे कचांदी नाला के रूख को मोडऩा है। आने वाले दिन में कंपनी इस पर भी कार्य करेगी। इन दोनों कार्यों में कंपनी को सफलता मिलती है तो इससे मानिकपुर खदान विस्तार की राह आसान हो जाएगी।
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आउट सोर्सिंग पर किया जा रहा खनन
मानिकपुर खदान से कोयला खनन आउट सोर्सिंग पर किया जा रहा है। ठेका कंपनियां यहां से खनन कर रही है। गिनती के ही कंपनी के अधीन कार्यरत कर्मचारी इस खदान में कार्य करते हैं। माइनिंग सरदार, ओवरमैन और इससे उपर रैंक के सभी अधिकारी एसईसीएल के हैं जबकि माइनिंग सरदार से नीचे कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या इस खदान में बेहद कम है। कोयला खनन से लेकर मिट्टी हटाने तक का कार्य ठेका कंपनियों के पास है।

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