कोरबा। कोल इंडिया की सहयोगी कंपनियों से सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को मुफ्त इलाज की सुविधा दिलाने कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम (सीपीआरएमएस) को लागू किया है। सेवानिवृत्त होने पर स्कीम से चिकित्सकीय इलाज का लाभ लेने एक बार 40 हजार रुपए का अंशदान कर्मचारियों को देना होता है। इसके बाद सालाना 8 लाख रुपए तक इलाज की सुविधा मिलती है। रिटायर्ड कोयला कर्मियों से अफसरों की मेडिकेयर स्कीम से इलाज में रिस्क कवर अधिक है।
कोल इंडिया के इंपैनल अस्पतालों में सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों को मेडिकेयर स्कीम से मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। बशर्ते सीपीआरएमएस स्कीम का सदस्य हो। अधिकारी वर्ग के लिए अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इनडोर इलाज के लिए खर्च की सीमा 25 लाख रुपए और आउटडोर इलाज पर दवाइयां व अन्य जरूरी टेस्ट की जरूरत पडऩे पर खर्च की सीमा सालाना 36 हजार रुपए निर्धारित किया है। इसी तरह कर्मचारी वर्ग के लिए इनडोर इलाज के लिए 8 लाख और आउटडोर इलाज की खर्च सीमा 25 हजार रुपए सालाना खर्च की सीमा तय है। इस तरह मेडिकेयर स्कीम में इलाज में मिलने वाली मेडिकल कवर में अफसर-कर्मियों के बीच राशि का बड़ा अंतर है। इनडोर इलाज में 17 लाख रुपए और आउटडोर इलाज में 11 हजार रुपए का अंतर है। इस मुद्दे को यूनियन नेताओं ने कोल इंडिया प्रबंधन की कई बैठकों में भी उठाया गया, मगर सेवानिवृत्त अधिकारियों की संख्या कम होने से रिस्क कवर की राशि अधिक होने का हवाला देकर अब तक कर्मचारियों के इलाज की खर्च सीमा में बढ़ोतरी नहीं की गई है। दूसरी ओर एसईसीएल समेत दूसरे सहयोगी कंपनियों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संख्या बढऩे से सीपीआरएमएस में सदस्य संख्या बढ़ी है। जानकार बताते हैं कि मेडिकेयर स्कीम का लाभ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलता रहे, इस पर सीपीआरएमएस फंड का कोष बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि साल 2031 तक ही फंड से इलाज की सुविधा मिल पाएगी। इसकी वजह अंशदान से कई गुणा ज्यादा निकासी है। मेडिकेयर स्कीम में वन टाइम अंशदान प्रति कोयला कर्मी 40 हजार और कोल इंडिया की ओर से प्रति कर्मी 18 हजार रुपए दिया जाता है। यूनियन नेताओं ने कहा कि रिटायर्ड कर्मियों के इलाज में रिस्क कवर बढ़ाना चाहिए, ताकि इलाज में खर्च सीमा की अंतर राशि कम हो। कोयला खदानों में जोखिम भरा कार्य कर्मचारियों को करना पड़ता है। इससे बढ़ती उम्र में गंभीर बीमारी की चपेट में आने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। अधिकारियों की तुलना में कर्मचारियों की इलाज में रिस्क कवर काफी कम है। पूर्व में इस मुद्दे को संगठन की ओर से कोल इंडिया प्रबंधन के समक्ष उठाया भी गया था। अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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