कोरबा। घर से काम पर जाने निकले युवक की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। उसे दो दोस्त सहारा देकर घर लाए और खाट पर सुलाकर लौट गए थे। उसकी आंख करीब तीन घंटे बाद भी नहीं खुली। उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। परिजन जीवित होने की उम्मीद से मृत युवक को लेकर निजी अस्पताल का चक्कर काटते रहे। आखिरकार शव को मर्चुरी में रखवाया गया। विडंबना तो यह है कि परिजनों ने मारपीट की आशंका जताई, लेकिन बयान में मारपीट के बजाय शराब सेवन का जिक्र कर दिया गया। बालको थानांतर्गत चेकपोस्ट भदरापारा में घसनीन चौहान निवास करती है। उसका बड़ा पुत्र संजय चौहान 35 वर्ष बालको के ठेका कंपनी में काम कर परिवार का भरण पोषण करते आ रहा था। वह ठेका समाप्त होने पर एक माह से घर में ही रह रहा था। शनिवार की सुबह संजय चौहान काम में जाने के नाम पर घर से निकला। करीब 11.15 बजे विजय तिवारी उर्फ बिट्टू और शिव कुमार उसे कंधे में सहारा देकर घर ले आए। वे संजय को खाट में सुलाकर लौट गए। तीन घंटे बाद पत्नी लता ने खाना खाने के लिए संजय को नींद से जगाने का प्रयास किया, तो उसकी आंख ही नही खुली। जिससे परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। वे तत्काल युवक को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। यह बाद परिजनों को नहीं पची। वे जीवित होने की उम्मीद से मृत युवक को कोसाबाड़ी स्थित निजी अस्पतालों का चक्कर काटते रहे, लेकिन निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी मौत की पुष्टि कर दी। आखिरकार परिजनों ने शव को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मर्चुरी में रखवा दिया। मामले में उस वक्त नया मोड़ आया, जब मेमो मिलने पर अस्पताल पुलिस ने परिजनों ने घटना की जानकारी ली। उन्होंने मृतक के मोबाइल से विजय और मंगल सिंह नामक दो लोगों को एक हजार रूपए ट्रांसफर होने की बात कही। साथ ही युवक के साथ शराब के लिए पैसे नहीं देने पर मारपीट की आशंका जताई। मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर अस्पताल पुलिस ने कंट्रोल रूम के माध्यम से बालको पुलिस को अवगत कराया। बालको थाने में पदस्थ एएसआई अस्पताल पुलिस चौकी पहुंचे। उनके सामने भी परिजनों ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए आशंका जताई। एएसआई के माध्यम से मृतक की मां का बयान दर्ज किया गया, लेकिन बयान में ऐसी किसी भी बातों का जिक्र ही नही किया गया। इसके उलट अज्ञात कारण और शराब सेवन का जिक्र कर दिया गया। मामले में पुलिस द्वारा पूरी प्रक्रिया अस्पताल पुलिस द्वारा किए जाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया गया। हालांकि पोस्टमार्टम या बिसरा जांच से मौत की वजह का खुलासा हो सकता है, लेकिन कागजी प्रक्रिया में गोलमोल से पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने में बेवजह विलंब होना तय है। बहरहाल मृतक के शव को वैधानिक कार्रवाई उपरांत परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है।
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