कोरबा। रंगोत्सव पर चंद्रग्रहण के कारण होली पर्व के दिन को लेकर संशय बना हुआ है। पर्व कब मनाना है, इसे लेकर अलग-अलग समाज का अलग-अलग मत है।
वहीं समाज का एक ऐसा वर्ग भी है, जो अपनों से दूर रहते हुए सामाजिक रीति-नीति के बंधनों से मुक्त होकर परंपरागत तिथि पर ही पर्व मनाने पर विश्वास रखता है। होलिका दहन शासकीय अवकाश व कैलेंडर में घोषित तिथि के अनुसार 3 मार्च को है। 4 मार्च को रंग-गुलाल खेला जाएगा। होली त्योहार में 3-4 दिन ही रह गए हैं। ऐसे में होली सामग्रियों की दुकानें चौक-चौराहों, साप्ताहिक बाजारों में सजने लगी हैं। यहां रंग-गुलाल से लेकर मुखौटे-पिचकारी आदि उपलब्ध हैं। खरीदारी करने वालों का उत्साह शुक्रवार व शनिवार से बाजार में दिखना शुरू हो जाएगा। लोग बच्चों व बड़ों के अनुसार उत्सव की खरीदारी में जुटेंगे। शहर में – निहारिका, बुधवारी, टीपी नगर, 5 पुराना बस स्टैंड, सीतामढ़ी क्षेत्र में 5 दुकानें सजकर तैयार हैं। यहां चहल-पहल बढ़नी शुरू हो गई है। 3 मार्च की शाम को चंद्रग्रहण व सुबह से सूतक लग रहा है। इसके कारण अग्रवाल समाज के लोग सामूहिक रूप से होलिका दहन 2 मार्च की रात 12 से 1 बजे के बीच करेंगे। इसी दिन सुबह दिन में ठंडी होलिका पूजन का विधान भी पुराना बस स्टैंड पर होगा। रंग-गुलाल की मस्ती व समाज का होली मिलन समारोह अग्रसेन भवन कोरबा में 4 मार्च को होगा। राजपूत क्षत्रिय समाज 3 मार्च को होलिका दहन करेगा। 4 मार्च को रंग-गुलाल खेला जाएगा। बाबूलाल कैलेंडर के अनुसार होलिका दहन चंद्रग्रहण का काल समाप्त होने के बाद रात 8 बजे के बाद होगा, जिसमें समाज के लोग शामिल होंगे। होली जलाने व खेलने को लेकर समाज में कोई उलझन नहीं है। समाज के रामजानकी मंदिर के पुजारी का भी यही मानना है।महाराष्ट्र मंडल के उत्सव-मुहूर्त आदि से संबंधित कैलेंडर काल निर्णय के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:55 बजे पूर्णिमा प्रारंभ हो रही है, जो 3 मार्च की शाम 5:09 बजे समाप्त हो रही है। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च को और धूली वंदन 3 मार्च को होगा। महाराष्ट्रीयन समाज के लोग इसी कैलेंडर को महत्व देते हैं। इसलिए तिथि को लेकर कोई संशय नहीं है। सर्व आदिवासी समाज द्वारा होली का पर्व 3 व 4 को मार्च को मनाया जाएगा। इसकी तैयारी घर-घर में शुरू कर दी गई है। समाज के लोग पंचांग को मानते हैं। चंद्रग्रहण के कारण जो अवरोध आ रहा है, उसकी अवधि पूर्ण होने के बाद 3 मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा। समाज के लोगों में त्योहार को लेकर कोई भ्रम नहीं है।
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