Tuesday, February 17, 2026

रात में सड़क पर नहीं आएंगे हाथी, लगाए जाएंगे रेट्रो रिफलेक्टिव बोर्ड, बोर्ड बनाने का दिया जा चुका है आर्डर

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रात में सड़क पर नहीं आएंगे हाथी, लगाए जाएंगे रेट्रो रिफलेक्टिव बोर्ड, बोर्ड बनाने का दिया जा चुका है आर्डर

कोरबा। जिले के कई गांव हाथी प्रभावित हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र के हाइवे किनारे और प्रमुख मागों पर रेट्रो रिफलेक्टिव बोर्ड लगाने का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। इसके लिए बोर्ड बनाने का आर्डर दिया जा चुका है। बोर्ड लगाने से रात के समय हाथी सड़क पर नहीं आएंगे। लोगों की सुरक्षा के साथ ही हाथियों की सुरक्षा के लिए काम किया जा रहा है। वन मंडल कटघोरा क्षेत्र में घूम रहा हाथियों का झुंड आए दिन हाईवे पर आकर खड़ा हो जाता है। इससे आवाजाही प्रभावित होती है। हाथी सड़क पर न आएं, इसके लिए 54 स्थानों पर रेट्रो रिफलेक्टिव बोर्ड लगाए जाएंगे। यह बोर्ड वाहनों की लाइट पड़ते ही चमकेगी। इससे हाथी वापस जंगल की ओर लौट जाएंगे। नेशनल हाईवे के साथ ही स्टेट हाईवे और जिला सड़क पर भी बोर्ड लगाए जाएंगे।कटघोरा वन मंडल के केंदई व एतमानगर रेंज से ही कटघोरा अंबिकापुर नेशनल हाईवे गुजरी है। इसके अलावा चोटिया से कोरिया के लिए स्टेट हाईवे भी निकली है। पसान और जटगा रेंज में भी हाथी सड़क पर कई बार खड़े हो जाते हैं। इससे दिन के साथ ही रात में भी आवाजाही प्रभावित होती है। इसे देखते हुए ही वन विभाग ने रेट्रो रिफ्लेक्टिव बोर्ड लगाने के लिए सर्वे कराया है। चारों रेंज में 54 स्थानों को चिह्नित किया है। हाईवे पर सड़क के दोनों ओर तीन फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा बोर्ड लगाकर हाथी से सतर्क रहने का संदेश दिया जाएगा। फसल को नुकसान पहुंचाया है।कटघोरा और कोरबा वन मंडल में हाथी से हमले की घटनाएं गर्मी के समय बढ़ जाती है। भोजन की तलाश में हाथी गांव के आसपास पहुंच जाते हैं। इसके अलावा तेंदूपत्ता के साथ अन्य वनोपज संग्रहण के लिए ग्रामीण जंगल की ओर जाते हैं। इस दौरान भी उनका हाथियों से सामना हो जाता है। हाथी अभी फसल को ही नुकसान अधिक पहुंचा रहे हैं।
कटघोरा वन मंडल में पिछले 6 साल से हाथी अब स्थायी रूप से रहने लगे हैं। पिछले साल अलग-अलग घटनाओं में हाथियों ने पांच ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला था। अभी वन मंडल में 48 हाथी अलग-अलग झुंड में घूम रहे हैं। जो अधिकांश समय जंगल में ही बिता रहे हैं। दो हाथी के केंदई रेंज में सूरजपुर से आए थे जो वापस लौट गए हैं। हाथियों ने इस वित्तीय वर्ष में सबसे अधिक 2958 हेक्टेयर के धान व अन्य फसल को नुकसान पहुंचाया है।

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