Wednesday, February 4, 2026

शादियों के दौर में परीक्षा, कोलाहल अधिनियम का पालन कराना चुनौती, विद्यार्थियों की तैयारी हो सकती है प्रभावित

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कोरबा। आगामी 5 फरवरी से शादियां शुरू हो रही हैं। फरवरी व मार्च में वैवाहिक मुहूर्त अधिक हैं। बिना डीजे के लोग शादी करना भी नहीं चाहते हैं। अधिक लगन होने के कारण स्वाभाविक है कि डीजे की कर्कश ध्वनि भी देर रात गुंजेंगी। वहीं शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण अंचल में गांव-गांव में धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। ये कार्यक्रम देर रात तक जारी रहते हैं। अधिकांश आयोजन समितियां अनुमति लेकर भी नियम के विपरीत साउंड सिस्टम का उपयोग कर ध्वनि फैलाती हैं इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। इन सबके बीच विद्यार्थियों की परीक्षाओं की तैयारी पर खलल पड़ना लाजमी है। ऐसे में कोलाहल अधिनियम का पालन कराना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं व 12वीं की सीजी बोर्ड परीक्षा 18 दिन बाद 20 फरवरी से शुरू हो जाएगी। जबकि 15 दिन बाद 17 फरवरी से सीबीएसई बोर्ड शुरू होने वाली है। वार्षिक के साथ बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है। हर छात्र पूरी ईमानदारी व गहनता के साथ पढ़ाई की तैयारी में जुटे रहते हैं। लेकिन उनकी तैयारी में ध्वनि विस्तारक यंत्रों से उठने वाला शोर बाधक बन रहे हैं। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा परीक्षा को नजदीक होते हुए भी अब तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर रोक लगाने का जिला प्रशासन के आदेश का इंतजार है। बोर्ड परीक्षा से पहले जिला प्रशासन द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग रोक लगा दिया जाता है। जिले में यह आदेश कब जारी होगा इसका इंतजार परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ उनके अभिभावकों को भी रहता है। क्योंकि अभिभावकों को उम्मीद रहती है कि उनका बच्चा बेहतर अंक ला सके और छात्र चाहते हैं कि उनकी तैयारी में कोई व्यवधान न आए। लेकिन ध्वनि प्रदूषण के कारण उनका ध्यान भटकता है और वे तैयारी ढंग से नहीं कर पाते हैं। छात्र या स्कूल प्रबंधन इन लाउडस्पीकरों के कारण होने वाले शोर की शिकायत जिला प्रशासन से कर सकते हैं। अब तक आदेश जारी नहीं किया गया है। जिससे परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों को अवरोध हो रहा है। ध्वनि विस्तारक यंत्रों को तेज आवाज में बजाकर लोग वाहवाही लूटते हैं। जबकि अधिकांश लोग इसकी अनुमति तक नहीं लिए होते हैं। ऐसे में विभाग को चाहिए कि बिना अनुमति के डीजे अथवा लाउडस्पीकर बजाने वालों पर कार्रवाई करे ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और वे अच्छे से तैयारी कर सकें। देर होने पर परिणाम पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।

सुबह 10 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक रहता है प्रतिबंध
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा ध्वनि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 (जो छत्तीसगढ़ में भी लागू है) का पालन कराने का प्रावधान है। इसके तहत यत 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर/डीजे का उपयोग प्रतिबंधित है और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना तेज आवाज में ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाने पर उपकरण जब्त करने और 6 महीने तक की जेल या जुर्माने का भी प्रावधान है। हालांकि परीक्षा के दौरान यह प्रतिबंध सुबह 10 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक लागू रहता है।

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