सतरेंगा में धीरे-धीरे सुविधाएं होने लगी कम, गार्डन का हाल पहले से ही बेहाल, क्रूज में भी सुधार की दरकार
कोरबा। पर्यटन स्थल सतरेंगा सरकारी उपेक्षा का शिकार हो गया है। जिला खनिज न्यास मद की राशि से इस स्थल का विकास किया गया था। लेकिन धीरे-धीरे यहां उपलब्ध कराई गई सुविधाएं कम हो रही है। बच्चों के लिए बनाया गया गार्डन का हाल पहले से ही बेहाल है। पूर्व में क्रुज के लिए निविदा निकाली गई थी उसमें बड़े पैमाने पर सुधार कर फिर निविदा निकाली गई थी। बताया गया था कि छत्तीसगढ़ का यह पहला त्रिपल डेकर क्रुज होगा जिसके सबसे पहले तल में चार एसी कमरे साथ में बाथरूम, बीच में रेस्टारेंट और आखिरी में लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। लेकिन सपना साकार नहीं हुआ। बोटिंग की सुविधा बंद होने से यहां पहुंचने वाले लोग मायूस हैं। लोग कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर लकड़ी की नाव पर सवारी करते हैं। सतरेंगा में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की सुविधा शुरु की गई थी। यह आंधी में रेस्टोरेंट टूट गया था। तब से इसकी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। एक तरफ सतरेंगा में पुराने बोट की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। तो दूसरी ओर नए पोनटून बोट खरीदने के लिए पूर्व में तैयारी की गई थी। बताया गया था कि यह बोट 12 सीटर का होगा। इसके लिए निकाली गई पहली निविदा को निरस्त कर दिया गया था। अब दूसरी बार फिर निविदा निकाली। लेकिन यह भी फाइनल नहीं हो सकी। पोनटून की योजना धरातल पर नहीं उतरी। इधर पर्यटन स्थल सतरेंगा में बीते कई महीने से बोटिंग की सुविधा बंद है। दरअसल छोटे बोट खराब हो गए हैं। साथ ही संचालन का ठेका भी समाप्त हो गया है। इस वजह से पर्यटकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। सरकारी उपेक्षा के कारण पयर्टन स्थल सतरेंगा से धीरे-धीरे पर्यटक दूरी बना रहे हैं।
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भवनों में सीपेज की मार
रिवर प्वाइंट व्यू पर वुड हाउस का निर्माण किया गया है। ताकि पर्यटकों को अधिक आकर्षित किया जा सके, लेकिन पुराने रिसार्ट हैं उनमें सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रही है। कई जगह से भवन सीपेज की मार झेल रहे हैं। खानपान की सुविधा और बढ़ाने की जरुरत है।
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गार्डन में झूले टूटे, सुविधाएं नदारद, ले रहे शुल्क
सतरेंगा में गार्डन में झुले टूट चुके हैं। पहले जो सुविधाएं लोगों को मिल रही थी वह अब पूरी तरह से नदारद है, फिर भी आम लोगों से 10 रूपए शुल्क लिया जा रहा है, शुल्क देने के बाद जब आम लोग प्रवेश कर रहे हैं तो निराश हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी पार्क की ओर ध्यान नहीं दे रहा है और सतरेंगा को भी पर्यटकों का इंतजार है।
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