सब्जियों में कीटनाशक दवाईयों का इस्तेमाल, सेहत पर मंडरा रहा खतरा
कोरबा। पिछले कुछ वर्षों में सब्जियों में भारी मात्रा में पेस्टीसाइड (कीटनाशक) दवाईयों का उपयोग कर रहे। बाजार में बिक रहे चमकीले और हरीभरी सभी सब्जियां पौष्टिक होगी, यह सोचना भी गलत है। रासायनिक खाद और केमिकल का उपयोग सब्जियों के उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इससे उत्पादन तो बढ़ रहा। साथ ही बाजार में सब्जियों के साथ बीमारी भी परोसा जा रहा है। यही वजह है कि अब लोगों का झुकाव देशी और बाडिय़ों की सब्जियों की ओर हुआ है।
जिले में जबसे हाईब्रिड सब्जियों का उत्पादन होना शुरू हुआ है, देशी सब्जियों की डिमांड कम हो गई है, इसका सीधा नुकसान लोकल किसानों को उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में सब्जियों की पूर्ति हाईब्रिड सब्जियों से ही हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि हाईब्रिड सब्जियों को किसी भी मौसम में लगाया जा सकता है। जबकि देशी सब्जियों के लिए मौसम की अनुकूलता जरूरी है।जिले में हाईब्रिड सब्जियों को इंजेक्शन तो नहीं लगाया जाता। लेकिन पौधे में फूल की मात्रा बढ़ाने, फल का आकार बढ़ाने और शाखाओं की वृद्धि के लिए केमिकल का उपयोग किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मिट्टी समेत मानव स्वास्थ्य पर यह विपरीत असर डाल रहा है। इसलिए किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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हाथों हाथ बिक जाती है देशी सब्जियां
हाईब्रिड सब्जियों के नुकसान को लोग समझने लगे हैं। यही कारण है कि बाजार या सडक़ किनारे जैसे ही देशी सब्जी उतरती है खरीददार टूट पड़ते हैं। जिले के कई इलाकों में बाडिय़ों में देशी तरीके से सब्जी उगाने वाले उत्पादक पसरा लगाते थे। सुबह 8 बजे बाजार लगता था और एक से डेढ़ घंटे में ही सब्जियां बिक जाती थी। अभी भी शहर के कई इलाकों में ग्रामीण देशी सब्जियां लेकर पहुंचते हैं। कुछ ही देर में इनकी सब्जियां हाथों-हाथ बिक जाती है।
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