समाजसेवी संस्था भूखों के लिए पहुंचा रहे दो वक्त का खाना, रोटी बैंक मिटा रही गरीबों की भूख, सेवा से जुड़े हैं 80 परिवार
कोरबा। शहर में एक संस्था जरूरतमंद लोगों तक दो वक्त का खाना पहुंचा रही है। इतना ही नहीं अपना घर आश्रम के जरिए लोगों का इलाज किया जाता है। इसके साथ ही उन्हें जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। छत्तीसगढ़ की उर्जाधानी कोरबा में रोटी बैंक से मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की भूख मिट रही है। भूख से बेचैन लोगों को समय पर रोटी मिल जाए तो उसकी दुआ भगवान के आर्शीवाद से कम नहीं। शहर के मुख्य मार्गों के किनारे, भोजनालय और होटल के सामने बेबस भूखे भिक्षुक और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को अक्सर देखा जा सकता है। ऐसे जरूरतमंदों तक दोनों समय भोजन उपलब्ध कराने शहर में रोटी बैंक सेवा चल रही है। शहर में मानव सेवा से जुड़ी संस्था छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसायटी रोटी बैंक सेवा चला रही है। साथ ही ऐसे लोगों के लिए अपना घर सेवा आश्रम में लाकर उपचार के साथ जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।घर-घर से रोटी इक्क_ा कर रहे संस्था के सदस्य शिवा, प्रतीक और मिहिर जहां दोनों समय सेवा में लगे रहते हैं। पेट की भूख को शांत रखने के लिए ही इंसान रात-दिन मेहनत करता है फिर भी कई ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है, लेकिन जिले में सामाजिक संस्था ने इस दिशा में पहल करते हुए असक्षम लोगों को भरपेट खाना खिलाने का बीड़ा उठाया है। इस कार्य में सहयोग के लिए कोसाबाड़ी से लेकर सीतामढ़ी तक के 80 परिवार के लोग जुड़े हैं। सहयोगी परिवार की महिलाएं हर दिन दोनों समय स्वभाव से रोटी, चावल और सब्जी बनाकर संस्था को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए देती हैं। दोनों समय का भोजन एकत्रित कर सदस्य संस्था के सेवा आश्रम, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन, साप्ताहिक बाजार सहित अन्य जगह पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुंचते हैं। रोटी बैंक छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख राणा मुखर्जी ने सहयोगी संगठन की नींव रखी। यह संस्था वर्ष 2018 से अब तक नियमित रूप से दोनों समय दानदाताओं के घर से प्रतिदिन लगभग 200 लोगों तक कार्यकर्ताओं के माध्यम से भोजन पहुंचा रहा है। जन सहयोग से रोटी बैंक और सेवा आश्रम का संचालन हो रहा है। नियमित डॉक्टर उपचार के लिए आश्रम पहुंचते हैं।
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