Sunday, February 1, 2026

हजारों किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने रह जाएंगे वंचित, उठाव नहीं होने से दोगुनी हुई परेशानी

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कोरबा। शासन द्वारा 2 महीने से चली आ रही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन इस दिन शनिवार की छुट्टी पड़ने की वजह से अब एक दिन पहले 30 जनवरी को ही धान खरीदी की तिथि समाप्त हो जाएगी। धान खरीदी के अंतिम दिन धान उपार्जन केंद्र दादरखुर्द में चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली, उपार्जन केंद्र में कुल 700 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से महज़ 408 किसानों से ही खरीदी हो सकी है। इस अकेले केंद्र में लगभग 250 किसान धान बेचने से वंचित रह गए हैं। समिति के कर्मचारियों की ओर से जानकारी दी गई कि किसानों का डाटा एग्रीस्टैक पोर्टल में कैरी फॉरवर्ड नहीं हो सका। जिसकी वजह से अब वह धान नहीं बेच पाएंगे। इस एक उपार्जन केंद्र के उदाहरण से यह समझा जा सकता है कि जिले और राज्य में क्या स्थिति बन रही है। धान खरीदी के टारगेट से कोरबा जिला भी पिछड़ता हुआ दिख रहा है। जितने मात्रा में पिछले वर्ष धान की खरीदी हुई थी। उसे आंकड़े को भी प्राप्त कर पाना अब तक लगभग असंभव जैसा प्रतीत हो रहा है। वर्तमान स्थिति में कोरबा जिले में 25 लाख 76000 क्विंटल धान की खरीदी हुई है, जबकि पिछले वर्ष 28 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग 3 लाख क्विंटल कम धान खरीदी होने की संभावना है। दादरखुर्द के उपार्जन केंद्र में बफर लिमिट से 10 गुना धान का स्टैकिंग किया गया है। पिछले 15 दिन से धान का उठाव बंद कर दिया गया है। धान के रीसाइकलिंग की शिकायत आने के बाद राज्य भर में शासन स्तर से उठाव पर रोक लगा दी है, इससे समस्याएं बढ़ी हुई है। उपार्जन केंद्रों में क्षमता से अधिक धान रखा हुआ है। कोरबा जिले के दादरखुर्द उपार्जन केंद्र की बफर लिमिट महज़ 900 क्विंटल है, लेकिन यहां 10000 क्विंटल धान का संग्रहण किया गया है। जो कि इसकी बफर लिमिट की तुलना से 10 गुना अधिक है। समिति के कर्मचारी किसी तरह धान का संग्रहण किए हुए हैं, लेकिन उन्हें मौसम का डर भयभीत कर रहा है। यदि मौसम बिगड़ तो विस्फोटक स्थिति निर्मित हो सकती है। उठाव बंद होने के बाद लगभग सभी उपार्जन केंद्रों की स्थिति एक जैसी है, पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसे हालात बने हुए हैं।

गुरुवार तक 25 लाख 76 हजार क्विंटल धान की खरीदी
जिले में गुरुवार तक की स्थिति में 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के जरिए कुल मिलाकर 25 लाख 76 हजार क्विंटल धान के खरीदी हुई है। कुल पंजीकृत किसानों में से 55 हजार 556 किसानों में से लगभग 40 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा है। जबकि लगभग 10 हजार किसान अब तक धान नहीं बेच सके हैं। पिछले वर्ष लगभग 28 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी. 2 दिन पहले तक कोरबा जिले में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख क्विंटल कम धान के खरीदी हुई है। अंतिम दो दिन में पिछले वर्ष की मात्रा को भी पीछे छोड़ना संभव नहीं लग रहा है।

टोकन जारी होने के प्रक्रिया पर कोई आदेश नहीं

वर्तमान स्थिति में किसानों को नया टोकन नहीं जारी किया जा रहा है। धान खरीदी की तिथि 31 जनवरी निर्धारित थी, लेकिन छुट्टी होने की वजह से 30 जनवरी को ही धान खरीदी समाप्त हो जाएगी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि धान खरीदी की तिथि को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अब तक किसी भी समिति प्रबंधक या सहकारी बैंक को इसकी सूचना नहीं दी गई है। धान रीसाइकलिंग की शिकायतों के बाद धान का उठाव भी बंद कर दिया गया है। यह भी समितियां के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।

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