Thursday, February 5, 2026

हाथियों से होने वाला नुकसान नहीं रोक पा रहा वन विभाग, ग्रामीणों को उठानी पड़ रही आर्थिक क्षति

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हाथियों से होने वाला नुकसान नहीं रोक पा रहा वन विभाग, ग्रामीणों को उठानी पड़ रही आर्थिक क्षति

कोरबा। जिले के जंगलों में हाथियों की सक्रियता बनी हुई है। वन विभाग की टीम सतर्कता बरत रही है। लेकिन नुकसान नहीं रोक पा रही। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी रात में खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन मंडल कोरबा में 37 हाथियों के चार झुंड ने 6 गांवों के 35 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। सबसे अधिक नुकसान बैगामार और लुदूखेत में 23 किसानों को हुआ। हाथियों का झुंड धरमजयगढ़ से पहुंचा है। चचिया में 15 हाथी, कुदमुरा और जिल्गा में 10 हाथी तथा मदनपुर जंगल में घूम रहे हाथियों ने केराकछार, दरगा, बताती और छिंदकोना में 7 किसानों की फसल को चौपट किया। वनमंडल कोरबा अंतर्गत पसरखेत व कुदमुरा रेंज में मौजूद हाथियों ने अब खेतों में पहुंचकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन व वन विभाग से फसल सुरक्षा की गुहार लगाई है। हाथी धान व मूंगफली की फसल को रौंदकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ किसान भी अपने फसल की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। फसल सुरक्षा को लेकर किसान ऐसे कदम भी उठा रहे हैं जा हाथियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। 3 दिन पहले तीन किसानों ने बिजली का तार खेत में बिछा दिया। इसकी चपेट में आने से हाथी की मौत हो गई। हाथी धान और फसल से आकर्षित होकर खेतों में पहुंच रहे हैं और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जोखिम भरा कदम उठा रहे हैं। इससे वन अमले की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। हाथी और मानव द्वंद रोक पाने में वह पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। हाथियों को जंगल तक सीमित रखना, जंगल में ही उनके लिए पर्याप्त भोजन पानी और अन्य संसाधन उपलब्ध कराना वन विभाग का अहम काम है। बीट गार्ड को एक कंपार्टमेंट का इलाका निगरानी के लिए सौंपा जाता है। पूरा जंगल छोटे-छोटे कंपार्टमेंट में विभाजित रहता है। प्रत्येक कंपार्टमेंट के लिए जवाबदेही तय रहती है। इसकी निगरानी में भी ढिलाई बरती जाती है। लाखों, करोड़ो खर्च कर लेमरू हाथी रिजर्व भी बनाया गया। लेकिन बावजूद इसके हाथी भी मर रहे हैं और किसानों के फसल भी बर्बाद हो रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि फसल से आकर्षित होकर हाथी खेतों की तरफ चले जाते हैं। जबकि ग्रामीण कहते हैं कि वन विभाग से कोई मदद नहीं मिलती। हाथियों को फसल से दूर रखने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जाता।
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हाथी और मानव दोनों एक-दूसरे से भयभीत
जिले में पिछले करीब तीन दशक से हाथियों की समस्या से ग्रामीण और किसान खासा परेशान हैं। हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है और इसके साथ-साथ आतंक भी। वर्तमान में हालात यह हैं कि हाथी और मानव दोनों एक-दूसरे से भयभीत हैं। ग्रामीणों को अपने जान-माल की चिंता है, किसानों को खेत में लहलहाते फसल को बचाने की चिंता है ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण इन फसलों के जरिए कर सके, तो दूसरी तरफ हाथियों को इंसानी फितरत से भय है। बेजुबान हैं,किन्तु उन्हें भी अपने व अपने कुनबे के जान की परवाह है। इंसान अपनी सुरक्षा के लिए हाथियों को कोई न कोई तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है जिससे उनकी भी जान जा रही है। दोनों ही तरफ जान बचाने की जद्दोजहद है और इस हाथी-मानव द्वंद को रोकने के लिए, आतंक और हादसों को कम करने के लिए कोई खास और ठोस पहल होती अब तक नजर नहीं आई है।
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वन विभाग की नाकाम कोशिशों पर सवाल
वन विभाग द्वारा की जाने वाली तमाम तरह की कवायदें नाकाम साबित हुई हैं और अब तो हालात ऐसे हैं कि हाथियों की ट्रैकिंग भी सही वक्त पर कई बार नहीं हो पाती है और इसका खामियाजा किसी न किसी घटना- दुर्घटना, नुकसान के रूप में सामने आ जाता है। हाथियों के रहवास के नाम पर योजनाओं ने सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति का काम किया है। वह कहीं ना कहीं इस मानसिकता से ग्रसित हैं कि हाथी तो आते-जाते रहेंगे और इस विशालकाय जानवर को कैसे रोक पाएंगे, इंसानों का नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बनाए गए नियमों से भरपाई कर दी जाएगी। कुछ इसी सोच के कारण हाथियों को बेहतर रहवास नहीं मिल पा रहा है, उनके भोजन और पानी की व्यवस्था में कहीं ना कहीं चूक बार-बार हर-बार की गई है।
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ग्रामीणों के मकान किए ध्वस्त
कोरबा वन मण्डल के ग्राम तौलीपाली और कुदमुरा में एक दंतेल हाथी ने तड़के लगभग 4:30 बजे बस्ती में घुसकर जमकर तबाही मचाई। तौलीपाली में बालक राम राठिया के घर को तोड़कर 1 बोरी धान और 1 कट्टी प्याज को नुकसान पहुंचाया। हाथी ने एक बोरी धान को अपनी सूंड में पकड़कर दूर ले जाकर खाया और फेंक दिया। कुदमुरा में पुनी राम घनुहार और मनमोहन राठिया के घरों को बुरी तरह तोड़कर दो-तीन बोरी धान को नुकसान पहुंचाया। इस घटना से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। बालक राम राठिया ने बताया कि बिजली गुल होने के कारण बस्ती में अंधेरा था, तभी हाथी ने बस्ती में घुसकर घर को तोड़ दिया और धान और प्याज को नुकसान पहुंचाया। वन विभाग की टीम ने सुबह मौके पर पहुंचकर जांच की। बालक राम राठिया ने वन विभाग से उचित मुआवजे की मांग की है।

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