Saturday, February 14, 2026

हार जीत का समीकरण बदलती रही है वोटिंग, रामपुर में ज्यादा वोटिंग का फायदा कांग्रेस को, कोरबा और पाली तानाखार में तीन चुनाव से नहीं दिखा है फैक्टर

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हार जीत का समीकरण बदलती रही है वोटिंग, रामपुर में ज्यादा वोटिंग का फायदा कांग्रेस को, कोरबा और पाली तानाखार में तीन चुनाव से नहीं दिखा है फैक्टर

कोरबा। चुनाव में अधिक से अधिक मतदान के प्रयास में निर्वाचन आयोग जुटा हुआ है। लगातार लोगों को मतदान के लिए जागरूक किया जा रहा है। वोटों से हार-जीत तो तय होता ही है। अधिक और कम वोटिंग पाॢटयों के लिए हानि और लाभकारी भी हुआ करती है। कोरबा जिले के विधानसभा सीटों में भी कम ज्यादा वोटिंग का अपना ही किस्सा है। विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रत्याशी और उनके समर्थक जीत हासिल करने पूरा जोर लगा रहे हैं। अपने वोटों को सहेजने और विरोधियों के वोट बैंक में सेंध लगाने अपने-अपने तरीके से प्रत्याशी जुटे हैं। वहीं निर्वाचन आयोग अधिक से अधिक मतदान कराने मोर्चा संभाले हुए है। इन दोनों के बीच का फैक्टर मतदान प्रतिशत कोरबा जिले में हार जीत का समीकरण बदलता रहा है। राजनीतिक पंडित वोटिंग के प्रतिशत से पार्टियों के हार जीत का आंकलन करते रहे हैं। कम वोटिंग में कौन सी पार्टी और ज्यादा मतदान होने पर किस दल को फायदा पहुंचता है यह आंकड़ा दिलचस्प रहता है। इस परिपेक्ष्य में कोरबा जिले की चारों सीटों की बात की जाए तो रामपुर विधानसभा ऐसा है जहां ज्यादा वोटिंग होने का फायदा कांग्रेस को मिला है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट पर 75.71 फीसदी मतदान हुआ था। जिसमें भाजपा के प्रत्याशी को जीत मिली थी। वर्ष 2013 में मतदान का आंकड़ा बढक़र 84.21 फीसदी रहा था जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी को 9915 वोटों से जीत हासिल हुई थी। वर्ष 2018 के चुनाव में एक बार फिर मतदान का प्रतिशत कम हुआ तो भाजपा को इसका फायदा मिला। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने गत चुनाव के मुकाबले दुगने वोटो से जीत हासिल की। वहीं पिछले तीन चुनाव में पाली तानाखार और कोरबा सीट ऐसा रहा है जिसमें वोटों के बढ़ते प्रतिशत के साथ कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। तीनों चुनावों में कांगे्रस प्रत्याशी ही दोनों सीटों पर जीत अर्जित करने में सफल रहे हैं। कटघोरा में वोटिंग प्रतिशत कम ज्यादा हुई तो दोनों ही राजनीतिक दलों की धडक़ने बढ़ती है। पिछले तीन चुनाव में कांग्रेस को 2 और भाजपा को एक बार जीत मिली है।
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कोरबा सीट पर बढ़ा है वोटिंग प्रतिशत
कोरबा विधानसभा वैसे तो हाईप्रोफाइल सीट होने के साथ ही शहरी क्षेत्र वाला है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले यहां मतदान का प्रतिशत कम रहा है। वर्ष 2008 के चुनाव में यहां 63.65, 2013 में 69.90 और गत चुनाव 2018 में 71.95 फीसदी वोटिंग हुई है। इस तरह पिछले तीन चुनाव मतदान में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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2013 के चुनाव में बढ़ा मतदान, तो कटघोरा में खिला कमल
कटघोरा सीट पर मतदान चाहे ज्यादा हो या कम भाजपा और कांगे्रस दोनों ही खेमे में टेंशन रहती है। वोटिंग का आंकड़ा कम हो या ज्यादा भाजपा और कांगे्रस दोनों ही दल के प्रत्याशी इन परिस्थितियों में जीत चुके हैं। हालांकि वोटिंग प्रतिशत बढ़ी तो वोटों के हार जीत का अंतर भी बढ़ा है। इस सीट पर 2008 के चुनाव में 68.63 फीसदी मतदाता प्रत्याशियों के भाग्यविधाता बने थे। इस चुनाव में कांगे्रस ने अपनी जीत का क्रम जारी रखा था। 2013 में वोटिंग में लगभग 6 फीसदी का इजाफा हुआ तो भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली थी। 2018 में फिर मतदान का प्रतिशत बढ़ा तो कांग्रेस को वापसी का मौका मिला था।
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आदिवासी बाहुल्य तानाखार में ज्यादा वोटिंग
पिछले तीन विधानसभा चुनाव में पाली तानाखार सीट पर वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है। इस सीट पर तीनों चुनाव में कांग्रेस को ही फायदा मिला है। वर्ष 2008 के चुनाव में 71.56, 2013 में 80.35 और 2018 के चुनाव में 82.13 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। यह सीट वन बाहुल्य आदिवासी क्षेत्र है। इसके बाद भी अपने मतदान के कर्तव्य को लेकर मतदाताओं में जागरूकता अधिक है।
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पिछले तीन चुनावों का लेखा जोखा
कोरबा विधानसभा
वर्ष मतदान प्रतिशत विजयी दल
2008 63.65 कांग्रेस
2013 69.90 कांग्रेस
2018 71.95 कांग्रेस

पाली तानाखार विधानसभा
वर्ष मतदान प्रतिशत विजयी दल
2008 71.56 कांग्रेस
2013 80.35 कांग्रेस
2018 82.13 कांग्रेस

रामपुर विधानसभा
वर्ष मतदान प्रतिशत विजयी दल
2008 75.71 भाजपा
2013 84.01 कांग्रेस
2018 83.33 भाजपा

कटघोरा विधानसभा
वर्ष मतदान प्रतिशत विजयी दल
2008 68.63 कांग्रेस
2013 74.58 भाजपा
2018 77.92 कांग्रेस

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