Saturday, February 14, 2026

अनोखी दिवाली, ऐसा गांव जहां ग्रामीण प्रभु राम की निकालते है झांकी

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अनोखी दिवाली, ऐसा गांव जहां ग्रामीण प्रभु राम की निकालते है झांकी

कोरबा: आमतौर पर लोग दिवाली में माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। घर और उसके आसपास दीपमाला से सजाया जाता हैं द्य एक दूसरे को मिठाई खिलाते हुए जमकर पटाखे जलाए जाते हैं, लेकिन जिले में एक ऐसा गांव है, जहां के ग्रामीण अनोखे अंदाज में दिवाली मनाते है। गांव में दिवाली की रात प्रभु राम, लक्ष्मण और माता सीता की झांकी निकाली जाती है। ग्रामीण मांदर की थाप और कर्मा नृत्य के साथ झांकी निकालकर भगवान राम की जयकारे लगाते हुए गांव की अंधेरी गली में भ्रमण करते है। इस दौरान महिलाएं और बड़े बुजुर्ग प्रभु राम की वेशभूषा में सजे बच्चो की पूजा कर नारियल व अन्य सामान भेंट करते है। इस झांकी के माध्यम से गांव में शांति और सौहाद्र का संदेश दिया जाता है। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर कोरबा विकासखंड के ग्राम कोरकोमा की। आदिवासी बाहुल्य ग्राम कोरकोमा में बीते 3 साल से अलग अंदाज में दिवाली मनाने की परंपरा चल रही है। गांव के मोतीराम राठिया बताते हैं कि भगवान राम को 14 बरस का वनवास हुआ था। वे भाई लक्ष्मण और अर्धांगिनी सीता के साथ 14 साल जंगल में गुजारे थे। इस दौरान उन्होंने लंका के राजा रावण का वध किया था। प्रभु राम दिवाली के दिन ही अयोध्या लौटे थे। उनका अयोध्यावासियों ने अमावस्या की रात दीप जलाकर स्वागत किया था। इस बात का उल्लेख प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है। हमारे द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम राम, लक्ष्मण और माता सीता की झांकी निकालकर उस दिन को याद किया जाता है। दिवाली की शाम गांव की महिलाएं, बड़े बुजुर्ग, बच्चे और युवा शिवनगर स्थित दुर्गा चौक के पास एकत्रित होते हैं। जहां बच्चों को भगवान राम, माता सीता व भाई लक्ष्मण के अलावा हनुमान जी सहित अलग-अलग पात्र के रूप में सजाया जाता है। उनकी पूजा आराधना की जाती है। इसके बाद झांकी निकाली जाती है। इस झांकी के साथ मांदर की थाप में करमा नृत्य करते हुए गांव में भ्रमण किया जाता है। चूंकि गांव में स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती, ग्रामीण घर के सामने दीपक जलाए रहते हैं। जिससे अंधेरी गलियों के बीच टिमटिमाती रोशनी से प्राचीन काल का अहसास होता है। इस अनोखे अंदाज में दिवाली मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान राम के अयोध्या वापसी को याद करना और गांव में शांति तथा सौहाद्र बनाए रखना होता है। इस परंपरा का निर्वहन आने वाले समय में भी किया जाएगा।

गांव की महिलाओं की होती है प्रमुख भागीदारी

ग्रामीण मोतीराम राठिया का कहना है कि भगवान राम की झांकी निकालने में महिलाओं की प्रमुख भागीदारी होती है। अब महिलाएं हर क्षेत्र में सामने आ रही है। गांव में महिलाओं के कई अलग-अलग कर्मा पार्टी तैयार है, जो मांदर की थाप के साथ करमा नृत्य करते हुए झांकी निकालकर गांव में भ्रमण करती है। उनके द्वारा सिर्फ झांकी में ही नहीं, बल्कि अन्य आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जाता है।

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