इस वित्तीय वर्ष भी एसईसीएल नहीं बन पाएगी नंबर वन उत्पादन कंपनी, ओडिशा की महानदी कोल फिल्ड्स लिमिटेड ने फिर पछाड़ा
कोरबा। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी ओडिशा की महानदी कोल फिल्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) को चालू वित्तीय वर्ष में 2040 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है। कंपनी को अब तक 1574.3 लाख टन कोयला उत्पादन करना था, पर इस लक्ष्य को पार करते हुए कंपनी 1594.4 लाख कोयला उत्पादन कर चुकी है। वहीं एसईसीएल को अब तक 1445.7 लाख टन कोयला उत्पादन करना था, पर कंपनी 1360 लाख टन ही कोयला उत्खनन कर सकी है। इस तरह एसईसीएल अभी से एमसीएल से काफी पीछे है। ऐसे कई मौके आए, जब साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड़स लिमिटेड (एसईसीएल) प्रबंधन ने कोयला उत्पादन व परिवहन के नए कीर्तिमान बनाने का ढिंढोरा पीटा। अब अंतिम परिणाम के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में केवल 67 दिन शेष रह गए हैं। निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने प्रतिदिन 8.50 लाख टन कोयला उत्पादन करने की चुनौती है। तमाम कवायदों के बाद भी 6.41 लाख टन उत्पादन हो पा रहा। इसके साथ ही इस बार भी कंपनी का नंबर दो पर लुढक़ना तय हो गया है।कोल इंडिया की आठ कंपनियों में सबसे बड़ी एसईसीएल कंपनी पिछले दो साल से उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रही है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में महानदी कोलफिल्डस लिमिटेड (एमसीएल) अपना टारगेट पूरा कर आगे निकल गई और एसईसीएल दूसरे नंबर पर रह गई। एसईसीएल प्रबंधन की नीतियों के कारण की भू-विस्थापितों के विवाद सुलझ नहीं पा रहा है। देश की सबसे बड़ी गेवरा कोयला खदान कोरबा में संचालित है। इसके अलावा दो मेगा प्रोजेक्ट कुसमुंडा व दीपका भी यहीं है। ऐसा शायद ही कोई दिन जाता हो, जब किसी एक कोयला खदान में धरना प्रदर्शन न चल रहा हो। इससे हर साल प्रबंधन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा। हो यह रहा कि पुराना विवाद निपट नहीं रहा और इसका असर नए भू-विस्थापितों पर पड़ रहा। विवाद को देखते हुए नए भू-विस्थापित जमीन खाली नहीं कर रहे और प्रबंधन के समक्ष संकट की स्थिति बनी हुई है।
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