कोरबा। केन्द्र सरकार के 44 श्रम कानूनों की जगह 4 श्रम संहिता को लागू करने के विरोध में एसईसीएल में 12 फरवरी को हड़ताल होगी। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त कन्वेंशन के निर्णय के बाद एसईसीएल स्तरीय चार केन्द्रीय श्रमिक संगठन एचएमएस, एटक, इंटक व सीटू की बैठक हुई। इसमें राष्ट्रव्यापी हड़ताल को एसईसीएल में सफल बनाने की रणनीति बनाई। इसी के मद्देनजर कोयला कर्मियों की गेट मीटिंग व आमसभा होगी। एसईसीएल में प्रस्तावित हड़ताल से कोयला उत्पादन प्रभावित होने पर सालाना 212 मिलियन टन कोयला खनन आसान नहीं होगा, क्योंकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में तीन महीने कम का समय बचा हुआ है। एसईसीएल की कोयला खदानों में हड़ताल की अवधि एक दिन की है, लेकिन यह माना जाता है कि इस तरह के हड़ताल से अगले दो से तीन दिन तक कार्य प्रभावित होता है। एसईसीएल अभी के कोयला उत्पादन लक्ष्य 154.91 मिलियन टन का 85 फीसदी खनन कर पाई है। इस तरह 130 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। अगले 71 दिनों में एसईसीएल को 82 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना होगा, तभी कोल कंपनी को सालाना लक्ष्य मिल पाएगा।
दीपका एरिया में आमसभा 10 फरवरी को
एसईसीएल दीपका एरिया में आमसभा 10 फरवरी को आयोजित की जाएगी। एसईसीएल दीपका एरिया के साथ ही कोरबा, गेवरा, रायगढ़ के सेंट्रल वर्कशॉप के कर्मचारियों व ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों के लिए आमसभा होगी। 11 फरवरी को एसईसीएल मुख्यालय में प्रस्तावित आमसभा में कोल कंपनी के सभी एरिया से ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारी जुटेंगे। आमसभा से पहले कोयला कर्मियों की खदानों के बाहर गेट मीटिंग ली जाएगी। इससे पूर्व 6 फरवरी को एसईसीएल के सभी एरिया दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
बालको के एटक कार्यालय में हड़ताल को लेकर बैठक
एल्युमिनियम एम्पलाईज यूनियन (एटक) बालको की कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक एटक कार्यालय में हुई। इसमें 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जानकारी दी। यूनियन के महासचिव सुनील सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 44 श्रम कानून को चार श्रम संहिता में बदला है। सत्ता में आने के बाद केन्द्र सरकार बेरोजगारी, महंगाई को कम करने लोगों से किए वादे भूल गई है। दूसरी ओर किसान, श्रमिक विरोधी फैसले ले रही है। राज्य एटक के महासचिव हरिनाथ सिंह ने भी केन्द्र सरकार पर निशाना साधा।
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