कोरबा। वित्तीय वर्ष समाप्ति को अब ज्यादा दिन शेष नहीं है। फरवरी के 6 और मार्च के 31 दिनों में एसईसीएल को भारी भरकम कोयला उत्पादन करना होगा। इसे लेकर जिले की मेगा परियोजनाओं पर दारोमदार है। कुसमुंडा मेगा परियोजना कंपनी के लक्ष्य हासिल करने में कमजोर कड़ी साबित हो रही है।
एसईसीएल की कुसमुंडा परियोजना को गेवरा के बाद दूसरा सबसे अधिक कोयला उत्पादन का टारगेट मिला हुआ है। गेवरा को 63 और कुसमुंडा को 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना है। कुसमुंडा परियोजना 21 फरवरी तक की स्थिति में लगभग 27 मिलियन टन ही कोयला उत्पादन कर सकी है। अभी भी एरिया को लगभग 23 मिलियन टन और कोयला उत्पादन करना होगा। कोयला उत्पादन बढ़ाने में एरिया को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त अवधि तक एरिया से 42 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन हो जाना था। कुसमुंडा के अलावा गेवरा और दीपका मेगा परियोजना की स्थिति बेहतर है। गेवरा ने अब तक 45 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन कर लिया है। दीपका एरिया ने 40 मिलियन टन लक्ष्य के मुकाबले 34 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है। एसईसीएल की बात की जाए तो सालाना 212 मिलियन टन टारगेट के मुकाबले 152 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन हो चुका है। एसईसीएल सालाना लक्ष्य को हासिल करने पूरा जोर लगा रहा है। इसे लेकर अधिकारियों द्वारा खदानों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। खासकर मेगा परियोजनाओं से कोयला उत्पादन बढ़ाने पर फोकस है। अधिकरी खदान के फेस तक उतरकर कोयला उत्पादन गतिविधियों का जायजा ले रहे हैं। साथ ही मौके पर स्टाफ से चर्चा भी की जा रही है।
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