कोरबा। चार नए लेबर कोड और सार्वजनिक उपक्रमों की निजीकरण सहित सरकार की अन्य नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया था। गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर है के एरिया मुख्यालयों में देखने को मिला। सुबह से खदानों के बाहर यूनियन नेता प्रदर्शन करते नजर आए। नारेबाजी कर उन्होंने सरकार की नीतियों की खिलाफत की। इस दौरान यूनियन नेताओं ने देश में लागू लेबर कोड बिल को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने और श्रमिकों के अधिकारों का हनन बताया।
हड़ताल को एचएमएस, इंटक, एटक व सीटू के पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इन चारों ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड बिल वापस लेने समेत अन्य मांगों पर देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है। एसईसीएल समेत कोल इंडिया की दूसरी सहयोग कंपनियों में चारों ट्रेड यूनियन कोयला कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में कोल इंडिया ने हड़ताल को टालने अपील भी की थी। मगर आम सभा के बाद अब हड़ताल से पीछे नहीं हटने का संकेत ट्रेड यूनियनों ने दिया था और हड़ताल को सफल बनाने तैयारी में जुटे रहे। यूनियन नेताओं ने कहा देश की आजादी से पहले और बाद के संघषों से 44 श्रम कानून बने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कानून बने। इसी श्रम कानून से खदान हादसे में किसी कर्मचारी के जान गंवाने या घायल होने पर परिवार को सहायता मिलती है। मगर अब उद्योगपतियों के हित की केन्द्र सरकार ने नए लेबर कोड बिल लाकर बेरोकटोक काम की छूट देना और श्रमिकों के अधिकार पाने किए जाने वाले आंदोलन को रोकना है। इससे श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा। उद्योगपतियों को संसाधन के दोहन की खुली छूट मिल जाएगी। सभी एरिया से एसईसीएल मुख्यालय में लेबर कोड बिल के खिलाफ यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया। नए लेबर कोड बिल के जरिए मजदूरों का हक और अधिकार छीना जा रहा है। इसे हर हाल में बचाना होगा। मजदूरों की सुरक्षा से ही देश सुरक्षित होगा। नए लेबर कोड बिल के प्रभावी होने से आने वाले समय में कोयला कर्मियों की नौकरी खतरे में आ जाएगी। हड़ताल का असर कोयला खदानों में देखने को मिला।
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