एसईसीएल ने एक दशक के सर्वाधिक भूमि अधिग्रहण रोजगार का बनाया रिकार्ड
कोरबा। एसईसीएल ने भूमि अधिग्रहण के प्रकरणों में इस वर्ष कुल 707 भूविस्थापितों को रोजगार स्वीकृत किए जो कि पिछले एक दशक में सर्वाधिक है। एसईसीएल ने गत वित्तीय वर्ष में सीएसआर के अंतर्गत विभिन्न सामाजिक कार्यों पर सीएसआर व्यय के लक्ष्य को हासिल किया। डीपीई दिशानिर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य एवं पोषण आहार पर 60फीसदी खर्च के लक्ष्य के मुकाबले एसईसीएल द्वारा सीएसआर व्यय का 70फीसदी इस क्षेत्र में खर्च किया गया।एसईसीएल द्वारा सीएसआर अंतर्गत “एसईसीएल के सुश्रुत” योजना की शुरुआत की गई जिसके तहत छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में स्थित कंपनी के संचालन क्षेत्रों के 30 बच्चों का चयन कर उनको निशुल्क आवासीय नीट-मेडिकल कोचिंग दी जा रही है। वर्ष 23-24 में एसईसीएल द्वारा अपने संचालन क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में अमृत फार्मेसी खोलने के लिए समझौता किया गया। अमृत फार्मेसी के खुलने एसईसीएल कर्मियों के साथ-साथ आमजनों को भी किफ़ायती दरों पर सामान्य बीमारियों से लेकर कैंसर एवं हृदय आदि से संबन्धित गंभीर रोगों की दवा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
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पर्यावरण संरक्षण में आगे रहा एसईसीएल
इस वर्ष कम्पनी ने लक्ष्य 430 हेक्टेयर के मुक़ाबले 475 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रिकार्ड 10.77 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जोकि कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में सर्वाधिक रहा। इसके साथ ही वर्ष 23-24 में एसईसीएल के भटगांव क्षेत्र में 20 मेगावाट की ग्राउंड माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर परियोजना से उत्पादन की शुरुआत हुई। वहीं एसईसीएल मुख्यालय एवं विभिन्न संचालन क्षेत्रों में 4,000 किलोवाट की रूफ-टॉप सोलर परियोजनाओं के लिए वर्क अवार्ड हुआ। कंपनी के विभिन्न संचालन क्षेत्रों में लगभग 15 इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रयोग में लाने की शुरुआत भी हुई।
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खदान के पानी का किया सदुपयोग
सतत धारणीय विकास अंतर्गत खदानों से निकले जल के सदुपयोग को प्रोत्साहित किया गया। वर्ष 2023-24 में एसईसीएल द्वारा खदान से निकला लगभग 258 लाख किलो लीटर जल सिंचाई और लगभग 28.20 लाख किलो लीटर खान जल घरेलू उपयोग हेतु उपलब्ध कराया गया।
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उत्पादन क्षमता का विस्तार, बंद खदान फिर हुई शुरू
वर्ष 2023-24 एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र अंतर्गत पेलमा ओपनकास्ट खदान को एमडीओ मोड में संचालन के लिए एसईसीएल एवं पेलमा कोलियरीज के बीच समझौता हुआ। कम्पनी की 8 परियोजनाओं में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पर्यावरण स्वीकृति हासिल की गयी जिससे सालाना 19 मिलियन टन से अधिक उत्पादन क्षमता का विस्तार हुआ है। कम्पनी के बिश्रामपुर क्षेत्र अंतर्गत कई वर्षों से बंद अमेरा ओसीपी खदान को पुन: शुरू किया गया।
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