कोरबा। सुराकछार, बलगी, बांकी भूमिगत खदानों के अघोषित रूप से बंद होने के बाद से एसईसीएल कोरबा एरिया की कोयला उत्पादन पर असर पड़ा है। जिसे लेकर ओपनकास्ट माइंस करतली ईस्ट परियोजना को शुरू करने की कवायद तेज कर दी गई है।
5 ग्राम पंचायतों की अधिग्रहित लगभग 1784 एकड़ जमीन पर एसईसीएल कोरबा एरिया की ओपनकास्ट माइंस करतली ईस्ट परियोजना खुलेगी। साल 2011 में धारा प्रकाशन कर जमीन का एसईसीएल ने अधिग्रहण किया है। लगभग 15 साल बाद अब एसईसीएल प्रबंधन ने ड्रोन सर्वे कराकर अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने गंभीरता दिखाई है। मगर खदान प्रभावित ग्रामीणों ने पुराने दर पर मुआवजा निर्धारण व आंशिक अधिग्रहण करने पर आपत्ति दर्ज कराकर विरोध जताने की तैयारी की है। मुआवजा निर्धारण व परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर निर्णय बताने प्रभावितों की प्रबंधन जल्द बैठकें ले सकती है। एसईसीएल कोरबा एरिया की मानिकपुर व सराईपाली ओपनकास्ट माइंस है। बीते वित्तीय वर्ष में नई खदान अंबिका माइंस से ओवरबर्डन हटाने का काम शुरू किया है। इस कारण खदान से कोयला उत्पादन में अभी समय लगेगा। अंबिका माइंस से प्रभावित ग्रामीणों को रोजगार देने की प्रक्रिया एसईसीएल ने शुरू कर दी है। कोल कंपनी में नियमित नौकरी की 155 खातेदारों को पात्रता मिली है, जबकि कुल प्रभावित खातेदार 678 हैं। इस बीच एसईसीएल ने ग्राम पंचायत करतली, पुटा, उड़ता, डोंगानाला व नुनेरा की अधिग्रहित जमीन पर करतली ईस्ट परियोजना खोलने की तैयारी शुरू की है। ग्रामीणों में अधिग्रहण की प्रक्रिया में लेटलतीफी पर पहले से नाराजगी बनी हुई है। अगर मुआवजा निर्धारण अधिग्रहण के समय के अनुसार पुराने दर पर किया गया तो विरोध सामने आएगा। हालांकि मुआवजा निर्धारण व परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के बाद मुआवजे की तय दर ग्रामीणों को बैठक में जानकारी देने से पूरी तरह स्पष्ट होगा।
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