Sunday, February 15, 2026

कटघोरा सीट पर नाराजगी के बीच कई दावेदार आ रहे सामने, माकपा ने ने भू विस्थापित नेता को उतारा मैदान में, कांग्रेस बीजेपी में टिकट घोषणा के बाद से अशांति

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कटघोरा सीट पर नाराजगी के बीच कई दावेदार आ रहे सामने, माकपा ने ने भू विस्थापित नेता को उतारा मैदान में, कांग्रेस बीजेपी में टिकट घोषणा के बाद से अशांति

 

कोरबा। जिले के कटघोरा विधानसभा सीट पर भाजपा कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद से पार्टी में अशांति का दौर शुरू हो चुका है। भाजपा के कुछ कार्यकर्ता प्रेमचंद पटेल को टिकट देने के खिलाफ प्रेस वार्ता में इसका विरोध कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के पुरुषोत्तम कंवर को रिपीट करने के बाद पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल के मैदान में उतरने की संभावना प्रबल हो गई है। इन सबके बीच भू विस्थापित नेता जवाहर सिंह ने भी चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है।
गत विधानसभा चुनाव में भाजपा से बागी हुए गोविंद सिंह राजपूत ने भाजपा को बड़ी चोट पहुंचाई थी। सीट से भाजपा प्रत्याशी लखन लाल देवांगन को हार का सामना करना पड़ गया था। इस बार भाजपा के साथ ही कांग्रेस में भी दावेदार घोषित होने के बाद कलह छिड़ गई है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कटघोरा विधानसभा क्षेत्र से जवाहर सिंह कंवर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। जिला कार्यालय बांकी मोंगरा में पार्टी समर्थकों की एक बैठक में पार्टी के जिला सचिव प्रशांत झा ने उनके नाम की घोषणा की। बैठक में पार्टी और सीटू के नेता वीएम मनोहर और एसएन बेनर्जी,नंदलाल कंवर,दीपक साहू,देवकुंवर कंवर भी उपस्थित थे। माकपा राज्य सचिव ने पहले ही जवाहर के नाम का अनुमोदन कर दिया था।
प्रशांत झा ने कहा है कि कांग्रेस-भाजपा के संपन्न करोड़पतियों के मुकाबले माकपा ने एक गरीब भूविस्थापित और संघर्षों के अगुआ आदिवासी नेता को मैदान में उतारा है। जवाहर सिंह कंवर माकपा जिला सचिवमंडल के सदस्य हैं और पिछले तीन वर्षों से छत्तीसगढ़ किसान सभा के जिला अध्यक्ष हैं। माकपा और किसान सभा व सीटू द्वारा बिजली-सडक़-पानी जैसी बुनियादी मानवीय सुविधाओं, भूविस्थापितों के पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मुद्दों और खेती-किसानी की समस्याओं पर इस दौरान जितने आंदोलन किए गए हैं, उनमें उन्होंने अगुआ नेता की भूमिका निभाई है। भूविस्थापितों के आंदोलन में उन्हें पुलिस की मार और जेल की हवा भी खानी पड़ी है। इस सबके कारण उनकी एक संघर्षशील नेता के रूप में छवि बनी है। उल्लेखनीय है कि जवाहर कंवर की पत्नी राजकुमारी कंवर कोरबा नगर निगम में माकपा पार्षद हैं। जवाहर का परिवार पहले दर्री बांध निर्माण के समय और बाद में एसईसीएल द्वारा भूमि अधिग्रहण के चलते दो बार विस्थापित हो चुका है और पुनर्वास रोजगार के साथ बसावट भूमि के पट्टे,पूर्व में अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस करने और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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