किसानों को पट्टा और अधिग्रहित जमीन को लौटाने की मांग को लेकर भरी हुंकार, 50 से अधिक गांव के भू विस्थापित किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट
कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा तथा भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने एसईसीएल के क्षेत्र में काबिज भू-विस्थापितों को पट्टा देने, पूर्व में अधिग्रहित भूमि मूल खातेदार किसानों को वापस करने, लंबित रोजगार प्रकरणों, पुनर्वास एवं खनन प्रभावित गांवों की समस्याओं के निराकरण के साथ 14 सूत्रीय मांगो को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचें। उन्होंने घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन की घोषणा की थी।
जिला प्रशासन और एसईसीएल के आश्वाशन से थके भू विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। घेराव को सफल बनाने की तैयारी को लेकर गांव गांव में पर्चे वितरण और बैठक कर भू विस्थापितों को एकजुट किया गया था। जिसका असर देखने को मिला। माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने बताया कि जिला प्रशासन की मदद से एसईसीएल द्वारा कुसमुंडा, गेवरा, कोरबा, दीपका क्षेत्र में कई गांवों का अधिग्रहण किया गया है। इस जबरन अधिग्रहण का शिकार गरीब किसान हुए हैं। आज भी हजारों भू-विस्थापित पट्टा, जमीन वापसी, रोजगार, बसावट और मुआवजा के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे है। अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और मूल किसान ही पीढ़ियों से काबिज है, उन्हें किसानों को वापस किया जाना चाहिए। जब किसानों की जबरन अधिग्रहित भूमि पर काबिज लोगों को पट्टे दिए जा रहे हैं, तो पुनर्वास गांवों के हजारों भू-विस्थापित किसानों को पट्टों से वंचित रखना समझ के परे हैं। इस क्षेत्र में जिला प्रशासन की मदद से एसईसीएल ने अपने मुनाफे का महल किसानों और ग्रामीणों की लाश पर खड़ा किया है। माकपा और किसान सभा इस बर्बादी के खिलाफ भू विस्थापितों के चल रहे संघर्ष में हर पल उनके साथ खड़ी है। किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू, जय कौशिक, शिवदयाल कंवर, देवकुमार पटेल, विजय कंवर, बसंत चौहान ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 699 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है। कोयला की दो दिनों तक आर्थिक नाकेबंदी के बाद त्रिपक्षीय वार्ता को टालने के काम भी उन्होंने किया है। इसलिए अब कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया है।
बॉक्स
यह है मांगे
1) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
2) कोल इंडिया द्वारा पूर्व में अधिग्रहित किये गये जमीनों को मूल खातेदार किसानों को वापस कराई जाये।
3) पूर्व में अधिग्रहित गांव के पुराने लंबित रोजगार प्रकरणों का वन टाइम सेटलमेंट कर सभी भू विस्थापितों को रोजगार प्रदान किया जाये।
4) जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और कि जा रही है उन सभी छोटे बड़े खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जाये।
5) शासकीय भूमि पर कबीजों को भी परिसंपत्तियों का पूर्ण मुआवजा एवं बसावट दिया जाए।
6) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
7) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
8) पुनर्वास गांव गंगानगर में तोड़े गए मकानों, शौचालयों का क्षतिपूर्ति मुआवजा तत्काल दिया जाये।
9) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती के किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।
10) बांकी माईन्स की बंद खदान के पानी को मड़वाढोंढा,बांकी बस्ती,पुरैना और आस पास के खेतों की सिंचाई और तीनों गांव के तालाबों को भरने की व्यवस्था की जाये।
11) पुनर्वास सभी गांव को पूर्ण विकसित मॉडल गांव बनाया जाये और सभी मूलभूत सुविधाएं पानी बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराया जाये।
12) भू विस्थापित परिवारों के सभी सदस्यों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा प्रदान किया जाये।
13) पुराने लंबित रोजगार प्रकरण में जिन भू विस्थापितों का सत्यापन नहीं हुआ है उनका शिविर लगाकर सत्यापन कराया जाये।
14) जिन किसानों के जमीन एसईसीएल में अधिग्रहण हुआ है उन्हें जब तक रोजगार, मुआवजा एवं अन्य सुविधा प्रदान नहीं की जाती तब तक भू विस्थापित किसान के जमीन पर किसी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जाये।
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