कोरबा रेल्वे स्टेशन आने तय करनी पड़ रही लंबी दूरी, पश्चिम क्षेत्र के लोग हो रहे परेशान, देना पड़ रहा अधिक किराया, प्री-पेड बूथ की कवायद साढ़े तीन साल बाद भी अधूरी
कोरबा। कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, बांकीमोंगरा सहित एक दर्जन से अधिक उप नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कोरबा रेलवे स्टेशन आने तक जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इसके लिए 20 से 25 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करना मजबूरी बनी हुई है। इसका विपरीत प्रभाव केवल यात्रियों के सफर में परेशानी ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के कारोबार पर भी काफी विपरित प्रभाव पड़ रहा है। अधिक किराया देना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन कोरबा में प्री-पेड बूथ की उम्मीद लिए यात्री साढ़े साल से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक बूथ की शुरूआत नहीं हो सकी है। सुविधा देने के नाम पर रेलवे प्रबंधन गंभीर नहीं है, लेकिन माल ढुलाई पर पूरा जोर लगाया जा रहा ह। बूथ नहीं होने की वजह से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। ऑटो चालक रात में यात्रियों से मनमाना किराया वसूल करते हैं। रेलवे प्रबंधन बूथ के लिए जगह देने के लिए राजी नहीं हो रहा है। रेलवे स्टेशन परिसर में प्री-पेड बूथ की कवायद साढ़े तीन साल पहले हुई थी। नगर निगम ने रेलवे से जगह उपलब्ध कराने को पत्राचार किया था। रेलवे ने स्टेशन के मुख्य द्वार के सामने कार पार्किंग स्थल के पास बूथ स्थापित करने के लिए सर्वे भी किया था। तब यात्रियों को उम्मीद थी कि स्टेशन पर बूथ लगने से ऑटो के निर्धारित किराए की राशि से स्टेशन से शहर के किसी भी कोने तक पहुंच सकेंगे, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक आगे नहीं बढ़ी है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार रेलवे प्रबंधन स्टेशन परिसर पर बूथ के लिए जगह देने के लिए राजी नहीं है। इस वजह से काम अटका हुआ है। इधर ट्रेन से आने वाले यात्रियों को रोजाना ऑटो के किराया को लेकर मथापच्ची करनी पड़ रही है। दिन में सामान्य किराया लिए जा रहे हैं। इसमें उप नगरीय क्षेत्र बालको, जमनीपाली, रजगामार, कुसमुंडा का नाम सुनते ही किराया 350 रूपए से प्रारंभ कर दिया जाता है। इसका हवाला आउटर और जर्जर सडक़ों का दिया जाता है। सबसे अधिक परेशानी देर रात को आने वाले यात्रियों को हो रही है। सुबह चार बजे स्टेशन पर गिनती के ऑटो रहती है और मजबूरी में यात्रियों को अधिक किराया देकर गंतव्य स्थान तक जाना पड़ रहा है।
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