खदान क्षेत्रों में पार्किंग क्षेत्र का नहीं हो पा रहा सही इस्तेमाल, सडक़ पर लग रहा जाम, आवागमन में हो रही परेशानी
कोरबा। कोयला खदान क्षेत्रों में जाम की स्थिति निर्मित नहीं हो इसके लिए कुसमुंडा के साथ-साथ गेवरा और दीपका में भी चिन्हित जमीन पर पार्किंग स्थल का निर्माण किया गया है। लेकिन इन क्षेत्रों में भी पार्किंग स्थल का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। गाडिय़ों के चालक यहां ठहरने के बजाए, सडक़ पर गाडिय़ां लगा देते हैं। जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। सडक़ पर लगने वाली जाम से छुटकारा के लिए कुसमुंडा क्षेत्र में पुलिस थाना के पास एसईसीएल की ओर से एक बड़े भू-भाग पर पार्किंग स्थल का निर्माण कराया गया है। लेकिन इस स्थल का इस्तेमाल नहीं पा रहा है। ना तो इसके लिए कोयला कंपनी का स्थानीय प्रबंधन रुचि ले रहा है और ना ही पुलिस। इससे लोग परेशान हैं। कारण, कोयला ढोने वाली गाडिय़ों का सडक़ व कॉलेनी के अंदर खाली जमीन पर खड़ा होना है। कंपनी की ओर से चिन्हित किया गया पार्किंग स्थल हमेशा खाली रहता है। एसईसीएल प्रबंधन के द्वारा सती नहीं बरतने की वजह से भारी वाहन चालक अपने वाहनों को रोड में बेतरतीब ढंग से खड़ा कर रहे हैं। विकास नगर कालोनी के अंदर भी खाली जगहों पर छोटे ट्रांसपोर्टरों के द्वारा अपने भारी वाहनों को खड़ी कर दी जाती है। इधर ईमलीछापर मुख्य मार्ग पर निर्माणाधीन सडक़ पर भारी वाहनों की पार्किंग लोगों के लिए अभी भी परेशानी का कारण बना हुआ है। कॉलोनी के अंदर भारी वाहन मालिकों के द्वारा खराब वाहनों को भी खड़ा कर रखा गया है। इसमें कुछ वाहन वर्षों पुराने हैं। बताया जाता है कि कुसमुंडा क्षेत्र की कॉलोनी, शिव मंदिर चौक से कुचैना मोड़ तक छोटी-बड़ी गाडिय़ां खड़ी रहती है। इससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। कई बार लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। इसके पहले भी बेतरतीब पार्किंग से कई लोग हादसे का शिकार हुए हैं और उनकी जान तक चली गई है। पुलिस ने भी कई बार बेतरतीब खड़ी गाडिय़ों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की है। लेकिन अभी तक कोयला परिवहन करने वाली गाडिय़ों के चालक नहीं सुधरे हैं। गौरतलब है कि कुसमुंडा इमलीछापर मार्ग निर्माणाधीन है। इसकी वजह से मार्ग पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शासन-प्रशासन व एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के द्वारा सख्ती नहीं बरतने से भारी वाहन चालक अपनी गाडिय़ों को मुख्य मार्ग पर खड़ी कर देते हैं। इससे छोटे वाहन चालकों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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