घी एवं खिचड़ी का सेवन हितकारी,माघ में मूली एवं मिश्री का न करें सेवन- डॉ.नागेन्द्र

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घी एवं खिचड़ी का सेवन हितकारी,माघ में मूली एवं मिश्री का न करें सेवन- डॉ.नागेन्द्र

कोरबा। हिंदी मासानुसार माघ माह का आरंभ 14 जनवरी से हो गया है। जो 12 फरवरी तक रहेगा। आयुर्वेद अनुसार प्रत्येक माह में विशेष तरह के खान-पान का वर्णन किया गया है। जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं। इसी विषय पर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है। यह संस्कार हमें विरासत में मिली है। इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिये। माघ मास से शिशिर ऋतु का आरंभ होता है इस माह में हवाएँ अत्यधिक ठंडी हो जाती है जिससे वातावरण भी अत्यधिक ठंडा हो जाता है। इस माह में वातावरण में कोहरा छाया रहता है। माघ मास शिशिर ऋतु का प्रथम माह है। इस माह से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होना प्रारंभ करने लगते हैं। जिससे सूर्य की उष्मा बढऩे लगती है और हवाओं में रूखापन अत्यधिक बढ़ जाता है। इस माह में पौष माह से अपेक्षाकृत ठंड ज्यादा होती है। जिसके लिये हमे ऊनी एवं गहरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिये साथ ही जुते, मोजे, कनटोप आदि का प्रयोग कर शरीर को ढककर ठंड से बचाव हेतु विशेष सावधानी बरतनी चाहिये। क्योंकि अत्यधिक ठंड की वज़ह से इस माह में हृदय संबंधी रोग हृदयाघात, वात रोग लकवा, जोड़ों में दर्द, कफज रोग, बुखार, सर्दी खांसी एवं त्वचा संबंधी रोग खाज, खुजली आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है। माघ मास में कफ दोष का संचय होता है। तिक्त रस प्रबल होता है और आकाश महाभूत की प्रधानता होती है। ऐसे में हमे मधुर, अम्ल, लवण रस युक्त तथा पोषक तत्त्वों वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इस माह में मूली एवं मिश्री का सेवन नहीं करना चाहिये। इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। साथ ही माघ माह में मूली के साथ धनिये का सेवन भी नहीं करना चाहिये यह विष (जहर) के समान माना गया है। इस माह में घी एवं खिचड़ी का सेवन करना हितकारी होगा। साथ ही इस माह में सूखा नारियल एवं कच्ची हल्दी का प्रयोग करना अत्यंत हितकारी होगा। माघ माह मे तिल, सरसों, मूंगफली, देशी घी, मक्खन आदि चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये। साथ ही इस माह में रसायन औषधि के रूप मे हल्दी एवं घी मिश्रित दुध का सेवन, च्यवनप्राश, अश्वगंधा पाक, बादाम पाक, आंवला, शतावर, विदारीकंद, अकरकरा, गोंद के लड्डु आदि का प्रकृति एवं नियमानुसार सेवन कर आरोग्य रहा जा सकता है।

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