Friday, February 20, 2026

चंद्रयान तीन विश्व कीर्तिमान गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज, अंजना सिंह ने बढ़ाया जिले का मान

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चंद्रयान तीन विश्व कीर्तिमान गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज, अंजना सिंह ने बढ़ाया जिले का मान

कोरबा। भारत सदैव आदिकाल से ज्ञान और विज्ञान को साथ में लेकर चला है, जो एक दूसरे के पूरक हैं। इसी श्रृंखला में हमारे भारत के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में पहुंचाने वाले ‘चंद्रयान’ विश्व के प्रथम इतिहास रचने वाले बन चुके हैं। जब चंद्रयान चंद्रमा पर उतरा तब छत्तीसगढ़ के धरती से डॉ आशा ‘आजाद’ एवं उर्मिला ‘उर्मी’ ने एक संकल्प उठाया कि साहित्यकारों की ओर से ‘चंद्रयान तीन विश्व कृतिमान’ के ऊपर में एक ऐतिहासिक कविता कलम के माध्यम से लिखेंगे। 23 जून को रायपुर के वृंदावन सभागार कक्ष में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान के तत्वाधान में सम्मान समारोह एवं पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बृजमोहन अग्रवाल (संसदीय संस्कृति एवं शिक्षा मंत्री), अति विशिष्ट अतिथि राजेश्री महंत रामसुंदर दास (पीठाधीश्वर दूधाधारी एवं शिवरीनारायण मंदिर), विशिष्ट अतिथि डॉ सुशील त्रिवेदी (पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन), उदयभान सिंह चौहान, सोनम शर्मा (गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड छत्तीसगढ़ प्रभारी), शकुंतला तरार , स्नेह लता पाठक, रामेश्वर वर्मा, संपादक आशा आजाद एवं उर्मिला उर्मी आदि की मंच पर उपस्थिति रह जिन्हें पूर्व में भी जर्मन, इंडोनेशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया गिनिस बुक आफ रिकॉर्ड आदि जैसे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शतक से भी अधिक सम्मान से सम्मानित किए जा चुका है। चंद्रयान तीन विश्व कीर्तिमान पुस्तक को संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान, वैदिक प्रकाशन एवं गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के द्वारा सभी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया है। इसी श्रृंखला जिन्हें तीन बार इंडिया गिनिस बुक आफ रिकॉर्ड मैं नाम शामिल हो चुका है एवं साहित्य के प्रति आत्मिक लगाव के कारण विभिन्न राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक मंचों पर अपनी योगदान और छाप छोड़ी हैं।
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साहित्यकार रशीदा मारकंडेय का सम्मान
चन्द्रयान तीन कीर्तिमान विश्वस्तरीय पद्य संकलन को गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हुआ। जिसे मूर्त रूप देने में 123 साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें जिले की कवियित्री रसीदा बानों मारकंडेय ने ‘अमर रहे भारत की धरती’ के माध्यम से अपना योगदान दिया। इसके लिए उन्हें गोल्डेन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ साथ राज्यस्तरीय सम्मान (छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग ),वैदिक प्रकाशन व छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान की ओर से भी सम्मानित गया।

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